निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : साल 2026 सर्राफा बाजार के लिए बेहद उतार-चढ़ाव भरा साबित हो रहा है। वर्ष की शुरुआत में सोने और चांदी की कीमतों ने रिकॉर्ड स्तर छू लिए, जिससे आम परिवारों की शादी की तैयारियां प्रभावित हो गईं। 10 ग्राम सोना करीब 2 लाख रुपये तक पहुंच गया, वहीं चांदी एमसीएक्स पर 4.20 लाख रुपये प्रति किलो के पार चली गई। लेकिन फरवरी आते-आते कीमतों में तेज गिरावट ने बाजार की दिशा ही बदल दी और निवेशकों-खरीदारों को असमंजस में डाल दिया।
रिकॉर्ड तेजी के बाद अचानक गिरावट से बढ़ी चिंता
कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव ने बाजार का भरोसा कमजोर कर दिया। खरीदार इस दुविधा में फंस गए कि अभी खरीदें या इंतजार करें, जबकि व्यापारियों के लिए स्टॉक रखना जोखिम भरा हो गया। परिणामस्वरूप सर्राफा बाजार की रौनक कम होती नजर आने लगी और लेन-देन सीमित हो गया।
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ज्वैलरी कारोबार और कारीगरों पर सीधा असर
राजकोट और मुंबई जैसे प्रमुख ज्वैलरी केंद्रों में कारोबार धीमा पड़ गया है। मांग घटने से फैक्ट्रियों और वर्कशॉप्स में काम कम हुआ, जिससे हजारों कारीगरों की आजीविका प्रभावित हुई। कई कारीगरों को गांव लौटना पड़ा या अन्य काम तलाशने पड़े, जो पारंपरिक ज्वैलरी कला के लिए चिंता का विषय है।
शादी की खरीदारी का बदला ट्रेंड
भारत में शादियों में सोने की अहम भूमिका होती है, लेकिन बढ़ती कीमतों ने खरीदारी का स्वरूप बदल दिया। जहां पहले एक शादी में 30-40 ग्राम सोना खरीदा जाता था, वहीं अब परिवार 5-10 ग्राम तक सीमित हो रहे हैं। भारी गहनों की जगह हल्की डिजाइन और पुराने गहनों को गलवाकर नए बनाने का चलन बढ़ा है।
वैश्विक कारणों से बढ़ी अनिश्चितता
विशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय आर्थिक परिस्थितियां, ब्याज दरों की नीतियां और वैश्विक तनाव ने सोने-चांदी को स्थिर निवेश के बजाय अस्थिर बना दिया है। हालांकि लंबी अवधि में बाजार के संभलने की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन फिलहाल सतर्कता बरतना जरूरी माना जा रहा है।
2026 ने यह संकेत दे दिया है कि शादी की चमक से ज्यादा जरूरी आर्थिक संतुलन और स्थिरता है।









