Gardening Tips: अक्टूबर का महीना किचेन गार्डनिंग शुरू करने के लिए अच्छा माना जाता है। मौसम में हल्की ठंडक आने लगती है और तापमान में कमी होने से कई मसालेदार पौधों की ग्रोथ के लिए अनुकूल वातावरण बन जाता है। अगर आप रोजमर्रा के खाने में इस्तेमाल होने वाले मसाले घर पर ही उगाना चाहते हैं, तो इस समय गमले, ग्रो बैग या घर के आसपास खाली पड़ी जमीन का इस्तेमाल किया जा सकता है।
खास बात यह है कि इसके लिए बहुत बड़ी जगह की जरूरत नहीं होती। थोड़ी-सी जगह में भी धनिया, मेथी, अजवाइन, सौंफ और अदरक जैसे पौधे लगाए जा सकते हैं।
अक्टूबर-नवंबर में लगा सकते हैं ये मसाले
अक्टूबर और नवंबर के दौरान घर के किचेन गार्डन में कई मसालेदार पौधों की शुरुआत की जा सकती है। धनिया और मेथी को बीज से आसानी से उगाया जा सकता है, जबकि अदरक को उसके छोटे टुकड़ों से लगाया जा सकता है। अजवाइन और सौंफ जैसी फसलों के लिए भी सही मिट्टी और पर्याप्त धूप मिलने पर अच्छी ग्रोथ देखी जा सकती है।
इन पौधों को ऐसी जगह लगाना बेहतर रहता है जहां रोजाना कुछ घंटे सीधी या पर्याप्त धूप पहुंचती हो। बहुत ज्यादा छाया में रखने से पौधों की विकास प्रभावित हो सकती है।
गमले में मसाले उगाने के लिए कैसी मिट्टी चाहिए?
गमले में किचेन गार्डन तैयार करते समय मिट्टी का मिश्रण सही रखना जरूरी है। सामान्य मिट्टी के साथ वर्मी कंपोस्ट या अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद और कोकोपीट या रेत मिलाई जा सकती है। इससे मिट्टी हल्की रहती है और अतिरिक्त पानी आसानी से बाहर निकल जाता है। गमले में नीचे ड्रेनेज होल जरूर होने चाहिए।
खाली जमीन पर बुवाई करते समय इन बातों का रखें ध्यान
अगर घर के आसपास खाली जमीन उपलब्ध है तो वहां भी मसालों का छोटा किचेन गार्डन बनाया जा सकता है। लेकिन बुवाई से पहले जमीन की मिट्टी को अच्छी तरह भुरभुरा कर लें और उसमें जैविक खाद मिलाएं। ऐसी जगह का चुनाव करें जहां बारिश या सिंचाई के बाद पानी लंबे समय तक जमा न रहे। इन पौधों को लगातार पानी देने की जरूरत नहीं होती। मिट्टी की ऊपरी परत सूखी नजर आने पर ही जरूरत के अनुसार सिंचाई करें। बहुत ज्यादा पानी जड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है।
थोड़ी देखभाल से मिलेगा ताजा मसाला
मसालों के पौधों की नियमित निगरानी करते रहें। सूखी पत्तियां हटाते रहें और मिट्टी में समय-समय पर हल्की गुड़ाई करें, ताकि जड़ों तक हवा पहुंचती रहे।






