Saturday, September 12, 2026
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Ganesh Chaturthi 2026: गणपति पूजा में भूलकर भी तुलसी न चढ़ाएं? जानें क्या कहती है मान्यता

Tulsi in Ganesh Puja: निशानेबाज न्यूज़ डेस्क –  गणेश चतुर्थी का पर्व भगवान गणेश को समर्पित है। साल 2026 में गणेश चतुर्थी 14 सितंबर को मनाई जाएगी। इस दिन घरों और मंदिरों में गणपति की स्थापना कर विधि-विधान से पूजा की जाती है। भगवान गणेश को दूर्वा और मोदक प्रिय माने जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि गणेश पूजा में तुलसी के पत्ते चढ़ाने की परंपरा नहीं है?तुलसी हिंदू धर्म में बेहद पवित्र मानी जाती है और भगवान विष्णु की पूजा में इसका विशेष महत्व है। इसके बावजूद गणेश जी को तुलसी अर्पित करने से बचा जाता है। इसके पीछे एक प्रचलित पौराणिक कथा बताई जाती है, जिसका संबंध तुलसी देवी और भगवान गणेश से है।

गणेश जी की तपस्या के दौरान पहुंचीं तुलसी
प्रचलित कथा के अनुसार, एक समय भगवान गणेश गंगा नदी के किनारे तपस्या कर रहे थे। इसी दौरान तुलसी देवी वहां से गुजरीं। गणेश जी को तपस्या में लीन देखकर तुलसी उनसे प्रभावित हो गईं। उनके मन में भगवान गणेश से विवाह करने की इच्छा पैदा हुई।कथा के अनुसार, तुलसी देवी ने गणेश जी के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा। लेकिन गणेश जी ने इसे स्वीकार नहीं किया। उन्होंने बताया कि वह ब्रह्मचर्य का पालन कर रहे हैं और विवाह करने की इच्छा नहीं रखते। भगवान गणेश के इनकार से तुलसी नाराज हो गईं।

तुलसी ने गणेश जी को दिया श्राप
मान्यता के अनुसार, विवाह का प्रस्ताव ठुकराए जाने से तुलसी देवी क्रोधित हो गईं और उन्होंने भगवान गणेश को श्राप दिया कि उनका विवाह होगा। धार्मिक कथा में आगे भगवान गणेश के रिद्धि और सिद्धि के साथ विवाह का उल्लेख मिलता है।तुलसी के श्राप से भगवान गणेश भी नाराज हुए। कथा के अनुसार, उन्होंने तुलसी को श्राप दिया कि उनका विवाह एक असुर से होगा। इसी श्राप के कारण दोनों के बीच संबंधों से जुड़ी यह कथा धार्मिक मान्यताओं में खास स्थान रखती है।
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गणेश जी ने तुलसी को दिया बड़ा वरदान
कथा के अनुसार, भगवान गणेश का श्राप मिलने के बाद तुलसी देवी ने अपनी गलती के लिए क्षमा मांगी। इसके बाद गणेश जी ने उन्हें वरदान दिया कि वह भगवान विष्णु की प्रिय होंगी और संसार में एक पवित्र पौधे के रूप में पूजी जाएंगी।इसी मान्यता के कारण तुलसी का संबंध भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा से विशेष रूप से जोड़ा जाता है। आज भी कई धार्मिक परंपराओं में भगवान विष्णु को तुलसी दल अर्पित करने की परंपरा है।

गणेश पूजा में तुलसी क्यों नहीं चढ़ाते?
यही वजह है कि सामान्य गणेश पूजा में तुलसी दल अर्पित नहीं किया जाता। गणेश चतुर्थी 2026 के दौरान भी भक्त भगवान गणेश को दूर्वा, मोदक और उनकी पसंद की अन्य चीजें अर्पित करते हैं, जबकि तुलसी से बचने की परंपरा निभाई जाती है।बताया जाता है कि ब्रह्मवैवर्त पुराण के गणेश खंड में तुलसी और भगवान गणेश से जुड़ी इस कथा का उल्लेख मिलता है। हालांकि अलग-अलग धार्मिक परंपराओं में पूजा विधि को लेकर कुछ अंतर भी देखने को मिलते हैं। इसलिए सामान्य रूप से गणेश पूजा में तुलसी न चढ़ाने की परंपरा का पालन किया जाता है।

दूर्वा का गणेश पूजा में खास महत्व
तुलसी की जगह भगवान गणेश की पूजा में दूर्वा का विशेष महत्व माना जाता है। गणेश जी को दूर्वा अर्पित करने की परंपरा काफी पुरानी है। कई स्थानों पर गणेश पूजा के दौरान 21 दूर्वा या 21 पत्र अर्पित करने की परंपरा भी देखने को मिलती है।गणेश चतुर्थी के दिन भक्त भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर उन्हें दूर्वा, मोदक, फल और अन्य पूजा सामग्री अर्पित करते हैं। मान्यता है कि श्रद्धा और भक्ति से की गई पूजा से गणपति प्रसन्न होते हैं।

गलती से तुलसी चढ़ जाए तो क्या करें?
अगर पूजा के दौरान अनजाने में भगवान गणेश को तुलसी चढ़ जाए, तो घबराने की जरूरत नहीं है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसी स्थिति में श्रद्धा से तुलसी को हटा सकते हैं और भगवान गणेश से क्षमा प्रार्थना कर सकते हैं।पूजा में अनजाने में हुई गलती को लेकर डरने के बजाय श्रद्धा और साफ मन से गणपति की आराधना करना बेहतर माना जाता है। गणेश चतुर्थी 2026 पर भी भक्त भगवान गणेश की पूजा अपनी पारिवारिक और क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार कर सकते हैं।

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