Ganesh Chaturthi Moon Sighting: निशानेबाज न्यूज़ डेस्क – गणेश चतुर्थी का पर्व इस बार 14 सितंबर, सोमवार को मनाया जाएगा। इस दिन घरों और पंडालों में भगवान गणेश की स्थापना की जाएगी। पूजा-पाठ के साथ इस पर्व से जुड़ी कई पुरानी धार्मिक मान्यताएं भी हैं।इन्हीं में से एक मान्यता गणेश चतुर्थी चांद दर्शन से जुड़ी है। धार्मिक मान्यता के अनुसार गणेश चतुर्थी की रात चंद्रमा को देखना शुभ नहीं माना जाता। कहा जाता है कि इस दिन चांद देखने वाले व्यक्ति पर झूठा आरोप या कलंक लगने की आशंका रहती है।
चंद्रदेव को क्यों मिला था गणेश जी का श्राप?
गणेश चतुर्थी चांद दर्शन से जुड़ी पौराणिक कथा भगवान गणेश और चंद्रदेव से संबंधित है। कथा के अनुसार एक बार चंद्रदेव ने भगवान गणेश के रूप को देखकर उनका उपहास किया। चंद्रदेव को अपने रूप और सुंदरता पर अहंकार था।चंद्रदेव के इस व्यवहार से भगवान गणेश नाराज हो गए। मान्यता है कि उन्होंने चंद्रदेव को श्राप दिया कि जो व्यक्ति गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा को देखेगा, उस पर झूठा कलंक लग सकता है।इसी कथा के कारण गणेश चतुर्थी चांद दर्शन को लेकर लोग सावधानी बरतते हैं। हालांकि, यह पूरी तरह धार्मिक और पौराणिक मान्यता है, जिसका वैज्ञानिक आधार नहीं बताया गया है।
इसी वजह से पड़ा ‘कलंक चतुर्थी’ नाम
गणेश चतुर्थी से जुड़े इस विश्वास के कारण इस तिथि को कई जगह कलंक चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा को देखने से व्यक्ति पर ऐसा आरोप लग सकता है, जिसका उसने कोई अपराध नहीं किया हो।गणेश चतुर्थी चांद दर्शन की यह मान्यता इतनी पुरानी है कि इससे जुड़ी एक कथा भगवान श्रीकृष्ण से भी जोड़ी जाती है।
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श्रीकृष्ण पर भी लगा था झूठा आरोप
पौराणिक कथा के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने भी एक बार गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा को देख लिया था। इसके बाद उन पर स्यमंतक मणि चोरी करने का आरोप लगा।बाद में श्रीकृष्ण ने इस आरोप को गलत साबित किया। इसी कथा को गणेश चतुर्थी चांद दर्शन से जुड़े विश्वास का उदाहरण माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इससे यह संदेश मिलता है कि इस दिन चंद्रमा देखने से बचना चाहिए।
गलती से चांद दिख जाए तो क्या करें?
अगर किसी व्यक्ति से अनजाने में गणेश चतुर्थी की रात चांद दिखाई दे जाए, तो घबराने की जरूरत नहीं मानी जाती। धार्मिक मान्यताओं में इसके लिए कुछ उपाय बताए गए हैं।कहा जाता है कि ऐसी स्थिति में भगवान गणेश का ध्यान करना चाहिए और स्यमंतक मणि से जुड़ी कथा सुननी या पढ़नी चाहिए। मान्यता है कि इससे चंद्र दर्शन से जुड़े दोष का निवारण हो सकता है।गणेश चतुर्थी चांद दर्शन को लेकर अलग-अलग क्षेत्रों में अलग परंपराएं भी देखने को मिलती हैं। इसलिए श्रद्धालु अपनी पारिवारिक और स्थानीय धार्मिक परंपरा के अनुसार पूजा-पाठ करते हैं।
क्या यह वैज्ञानिक नियम है?
यह समझना जरूरी है कि चंद्रमा को देखने से झूठा आरोप लगने की बात धार्मिक और पौराणिक मान्यता पर आधारित है। विज्ञान में ऐसा कोई प्रमाण नहीं है कि गणेश चतुर्थी की रात चंद्रमा देखने से किसी व्यक्ति पर झूठा आरोप लग सकता है।इसलिए इसे आस्था और परंपरा के संदर्भ में ही समझना चाहिए। श्रद्धालु अपनी मान्यता के अनुसार इस दिन चंद्र दर्शन से बचते हैं और भगवान गणेश की पूजा करते हैं।






