drugs case : भोपाल.मुंबई। राजधानी में सामने आया एमडी ड्रग्स का मामला अब सिर्फ नशे की तस्करी तक सीमित नहीं रह गया है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, यह केस एक संगठित आपराधिक सिंडिकेट के रूप में उभर रहा है, जिसमें ड्रग्स, यौन शोषण, धर्मांतरण, हथियारों की तस्करी और जमीन कब्जे जैसे गंभीर अपराधों के लिंक सामने आ रहे हैं। इस पूरे नेटवर्क के केंद्र में है यासीन अहमद उर्फ यासीन मछली, जो शहर के नामी मछली कारोबारी परिवार से जुड़ा है। वहीं मुंबई ड्रग्स तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए मुंबई पुलिस को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है. पुलिस ने कर्नाटक के मैसूर शहर में छापेमारी कर एक अवैध मेफेड्रोन निर्माण इकाई का भंडाफोड़ किया है. इस ऑपरेशन में 192 किलोग्राम मेफेड्रोन जब्त किया गया है. इसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत करीब 390 करोड़ रुपए बताई जा रही है.
drugs case : नशे की आड़ में शोषण और ब्लैकमेलिंग
drugs case : पुलिस जांच में पता चला है कि यासीन मछली भोपाल के दो बड़े पबों में डीजे के रूप में काम करता था, जिनके ज़रिए एमडी ड्रग्स और अन्य नशे की सप्लाई होती थी। इन पबों में आने वाली युवतियों को पहले मुफ्त नशा देकर आदी बनाया जाता, फिर बेहोशी की हालत में उनके साथ दुष्कर्म किया जाता। इस दौरान उनके अश्लील वीडियो बना लिए जाते और फिर ब्लैकमेल कर शोषण का चक्र चलता रहता। पुलिस ने यासीन के मोबाइल से 100 से ज्यादा अश्लील वीडियो बरामद किए हैं।
drugs case : धर्मांतरण के लिए दबाव और हिंसा
drugs case : एक युवती ने आरोप लगाया कि यासीन के चाचा सारिक मछली के इशारे पर उसे धर्म बदलने का दबाव डाला गया। आरोपी दिव्यांश अहिरवार, जो मैनिट का छात्र बनकर युवती से मिला था, उसे क्लब-90 में ले गया और वहां दुष्कर्म किया। दिव्यांश ने युवती को धमकाया कि वह सारिक मछली और उसके गुर्गों को “खुश” करे। युवती का कहना है कि उसके द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर को भी पुलिस ने जानबूझकर कमजोर किया, ताकि आरोपी को जल्दी जमानत मिल सके।
drugs case : हथियार तस्करी और प्रदेशों में फैला नेटवर्क
drugs case : जांच में यह भी सामने आया है कि मछली परिवार न केवल नशा, बल्कि हथियारों की तस्करी में भी शामिल था। हथियार प्रदेश के बाहर से बनकर भोपाल में पहुंचाए जाते थे। हाल ही में आरोपी जगजीत सिंह बैस उर्फ ‘जग्गा’ को भोपाल एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया, जो पंजाब से जुड़ा बताया गया है। यासीन के मोबाइल चैट्स से यह साफ हुआ है कि उसका नेटवर्क पंजाब, राजस्थान और महाराष्ट्र तक फैला हुआ था।
drugs case : सामाजिक प्रभाव और राजनीतिक दबाव
drugs case : पीड़ित परिवारों ने आरोप लगाया है कि 2013 से लेकर अब तक वे सीबीआई, मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री तक शिकायत कर चुके हैं, लेकिन राजनीतिक दबाव के चलते उनकी सुनवाई नहीं हुई। कई पीड़ित युवतियां अभी भी सामने नहीं आ पा रही हैं क्योंकि वे मछली गैंग के खौफ में हैं।
drugs case : सरकारी और निजी जमीन पर अवैध कब्जा
drugs case : शारिक मछली और यासीन पर सरकारी व निजी जमीनों पर कब्जे के आरोप भी लगे हैं। क्राइम ब्रांच ने जिला प्रशासन को पत्र लिखकर उनकी संपत्तियों की जांच की सिफारिश की है।
drugs case : भोपाल एडिशनल डीसीपी (क्राइम) शैलेन्द्र सिंह चौहान ने कहा है कि यह मामला गंभीर और बहुआयामी है। सोशल मीडिया पर गलत जानकारी न फैलाएं, और जैसे-जैसे साक्ष्य मिल रहे हैं, पुलिस कड़ी कार्रवाई कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि आरोपी इतने प्रभावशाली हैं कि उनके डर से कई पीड़ित FIR दर्ज कराने से भी कतरा रहे हैं।
drugs case : भोपाल का यह मामला सिर्फ एक ड्रग रैकेट नहीं, बल्कि एक भयावह आपराधिक साजिश है, जिसमें महिलाओं का शोषण, धार्मिक कट्टरता, हथियारों की तस्करी और राजनीतिक संरक्षण जैसे कई गंभीर पहलू जुड़े हैं। आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से और भी बड़े नाम सामने आ सकते हैं। पुलिस जांच जारी है और कई परतें अभी खुलनी बाकी हैं।
READ MORE : Parliament Monsoon Session : ऑपरेशन सिंदूर पर संसद में आज भी घमासान, शाह-मोदी देंगे विपक्ष को करारा जवाब
drugs case : वहीं मुंबई ड्रग्स तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए मुंबई पुलिस को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है. पुलिस ने कर्नाटक के मैसूर शहर में छापेमारी कर एक अवैध मेफेड्रोन निर्माण इकाई का भंडाफोड़ किया है. इस ऑपरेशन में 192 किलोग्राम मेफेड्रोन जब्त किया गया है. इसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत करीब 390 करोड़ रुपए बताई जा रही है. इस मामले में अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है. इनमें से पांच आरोपी मुंबई के रहने वाले हैं.
drugs case : पुलिस उपायुक्त दत्ता नलावडे ने सोमवार को बताया कि इस रैकेट की जांच की शुरुआत अप्रैल 2024 में हुई थी, जब मुंबई के साकीनाका इलाके में एक व्यक्ति को 52 ग्राम मेफेड्रोन के साथ पकड़ा गया था. पूछताछ के दौरान आरोपी ने पुलिस को एक बड़े ड्रग्स नेटवर्क की जानकारी दी. इसके बाद एक के बाद एक कड़ियां जुड़ती गईं और तीन और लोगों को गिरफ्तार किया गया. इनसे 4.53 किलोग्राम मेफेड्रोन बरामद किया गया, जिसकी कीमत 8 करोड़ रुपए थी.
drugs case : पुलिस ने जांच को आगे बढ़ाते हुए 25 जुलाई को बांद्रा रिक्लेमेशन से सलीम इम्तियाज शेख उर्फ सलीम लांडगा (45) को गिरफ्तार किया. पूछताछ में शेख ने मैसूर में एक ऐसे ठिकाने का खुलासा किया, जो बाहर से एक होटल और गैरेज जैसा दिखाई देता था, लेकिन अंदर एक पूरी ड्रग्स फैक्ट्री संचालित हो रही थी. इस फैक्ट्री में तैयार मेफेड्रोन मुंबई और उसके आसपास के जिलों में सप्लाई किया जा रहा था. 26 जुलाई को मैसूर में की गई छापेमारी में तीन और लोगों को गिरफ्तार किया गया.
drugs case : इस प्रकार अब तक इस मामले में कुल आठ गिरफ्तारियां हो चुकी हैं. डीसीपी के मुताबिक, यह एक सुनियोजित और संगठित ड्रग्स नेटवर्क है. इसकी जड़ें मुंबई से लेकर कर्नाटक तक फैली हुई हैं. पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपियों को मेफेड्रोन तैयार करने का फार्मूला कहां से मिला और नेटवर्क का फाइनेंशियल सपोर्ट कैसे हो रहा था. पुलिस का मानना है कि इस सिंडिकेट में और भी लोग शामिल हो सकते हैं. आगे की जांच में अतिरिक्त गिरफ्तारियां संभव हैं.
drugs case : सभी आरोपियों के खिलाफ नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंसेज एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है. पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क के वित्तीय लेनदेन, सप्लाई चैन और अंतरराज्यीय कनेक्शन की परत-दर-परत पड़ताल कर रही है. मुंबई और मैसूर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई को अब तक की सबसे बड़ी सिंथेटिक ड्रग्स सीज़र में से एक माना जा रहा है. यह ऑपरेशन दिखाता है कि देश में फैले ड्रग्स माफिया के खिलाफ लड़ाई में पुलिस की सतर्कता कितनी निर्णायक हो सकती है.
drugs case : भोपाल और मुंबई से सामने आए ड्रग्स तस्करी के इन मामलों ने यह साफ कर दिया है कि नशे का कारोबार अब सिर्फ एक आपराधिक गतिविधि नहीं, बल्कि एक संगठित और बहुस्तरीय सिंडिकेट का हिस्सा बन चुका है। भोपाल में जहां मछली परिवार की आड़ में नशा, यौन शोषण, धर्मांतरण, हथियार सप्लाई और ज़मीन कब्ज़े जैसे गंभीर अपराधों का खुलासा हुआ है, वहीं मुंबई से भी 390 करोड़ की ड्रग फैक्ट्री का भंडाफोड़ देश के भीतर फैले इस जहर के नेटवर्क की गंभीरता को उजागर करता है। सवाल यह है कि इतने लंबे समय तक ये नेटवर्क कैसे सक्रिय रहे? क्या इनके पीछे कोई राजनीतिक या आर्थिक संरक्षण रहा? और क्या हमारी सुरक्षा एजेंसियां समय रहते कार्रवाई कर पाईं?













