Drug mafia : इंदौर। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बीजेपी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने बीजेपी विधायक प्रतिमा बागरी के भाई को अवैध मादक पदार्थ के साथ पकड़े जाने के मामले को उठाते हुए प्रतिमा बागरी से तत्काल इस्तीफे की मांग की है। पटवारी ने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार नशा माफियाओं को संरक्षण दे रही है और राज्य में नशे के कारोबार को बढ़ावा दे रही है।
Drug mafia : नशा माफिया की सरकार: जीतू पटवारी का तीखा हमला
जीतू पटवारी ने अपने बयान में कहा कि मध्य प्रदेश के लोगों को अब यह समझना पड़ेगा कि यह बीजेपी की सरकार नहीं, बल्कि नशा माफिया की सरकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि मिर्ची केस में भी मंत्री विश्वास सारंग का पारिवारिक रिश्ता मिला था। पटवारी ने कहा, “यह सरकार खुद नशे पर सवार है, और नशे में हम पंजाब को पीछे छोड़ रहे हैं।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बीजेपी विधायक प्रतिमा बागरी का इस्तीफा तुरंत होना चाहिए ताकि यह संदेश जाए कि सरकार अवैध गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं करेगी।
Drug mafia :
उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के नाम में हुई संभावित ‘गलतफहमी’ (गलफत) पर प्रतिक्रिया देते हुए जीतू पटवारी ने स्पष्ट किया कि उनका इशारा मुरली देवड़ा की ओर था। पटवारी ने दावा किया कि मुरली देवड़ा के साथ ड्रग कारोबारियों के फोटो हैं, जिसके माध्यम से उन्होंने राज्य के बड़े नेताओं के कथित तौर पर नशा कारोबारियों से संबंध होने का आरोप लगाया। इस बयान ने राज्य की राजनीति में उच्च पदों पर बैठे लोगों की संलिप्तता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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जीतू पटवारी ने खजुराहो में हाल ही में हुई फूड पॉइजनिंग की घटना को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने बताया कि इस घटना में 4 व्यक्तियों की दुखद मौत हो गई, लेकिन मुख्यमंत्री या किसी भी मंत्री ने अब तक मृतकों के परिजनों से मुलाकात नहीं की। पटवारी ने इसे सरकार की असंवेदनशीलता बताया और कहा कि एक तरफ सरकार खजुराहो में बड़े-बड़े विकास की बात कर रही है, वहीं दूसरी तरफ मानवीय संवेदनाओं को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया है।
कुल मिलाकर, जीतू पटवारी का यह बयान सीधे तौर पर बीजेपी सरकार पर नशा माफिया को संरक्षण देने और आपराधिक तत्वों से संबंध रखने का आरोप लगाता है। प्रतिमा बागरी के इस्तीफे की मांग और ड्रग कारोबारियों से कथित संबंधों के खुलासे से राज्य की राजनीति में भूचाल आना तय है। इसके अलावा, खजुराहो त्रासदी पर सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाकर पटवारी ने यह सिद्ध करने का प्रयास किया कि मोहन सरकार जनता की समस्याओं से विमुख हो चुकी है।











