माँ
सहस्त्रदलपद्मस्थां पद्मनाभप्रियां सतीम्।
पद्मालयां पद्मवक्त्रां पद्मपत्राभलोचनाम्।।
पद्मपुष्पप्रियां पद्मपुष्पतल्पविशायिनीम्।
पद्मिनीं पद्महस्तां च पद्ममालाविभूषिताम्।।
पद्मशोभाविवर्धिनीम्। पद्मकाननं पश्यन्तीं सस्मितां तां भजे मुदा।।
भावार्थ : सहस्त्रदलकमल जिनका आसन है, जो पद्मनाभ की सती-साध्वी प्रियतमा हैं, कमल जिनका घर है, जिनका मुख कमल के सदृश और नेत्र कमलपत्र की सी आभा वाले हैं, कमल का फूल जिन्हें अधिक प्रिय है, जो कमल-पुष्प की शय्या पर शयन करती हैं, जिनके हाथ में कमल शोभा पाता है, जो कमल-पुष्प की माला से विभूषित हैं, कमलों के आभूषण जिनकी शोभा बढ़ाते हैं, जो स्वयं कमलों की शोभा की वृद्धि करने वाली हैं और मुस्कराती हुई जो कमल-वन की ओर निहार रही हैं, उन पद्मिनी देवी का मैं आनन्दपूर्वक भजन करता हूँ।
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दीपावली पूजन के शुभ मुहूर्त
दिनांक 20 अक्टूबर 2025 सोमवार
सनातन धर्म के समस्तजन को पञ्च दिवसीय दीपोत्सव पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ।
इस वर्ष दिनाँक 20 अक्टूबर सोमवार को दोप. 03.45 मि. से अमावस तिथि लगेगी जो कि दूसरे दिन 21 अक्टूबर मंगलवार की सांयः 05.55 मि. तक रहेगी। दीपावली पर्व के लिए सबसे महत्वपूर्ण प्रदोष वेला एवं महानिशीथ काल 20 को ही मिल रहे हैं। अतः इस वर्ष दीपावली पर्व उदया चतुर्दशी तिथि में 20 को ही मनाया जाएगा।
पर्व काल होने से सम्पूर्ण दिवस पर्यंत पूजन कर सकते हैं।
हस्त नक्षत्र में अवसरित दीपोत्सव पर्व के शुभ दिन यमदीपदान एवं महालक्ष्मी कूबेर पूजन करने के लिए शुभ मुहूर्त।
दीपावली पूजन के शुभ मुहूर्त
दिनांक 20 अक्टूबर 2025 सोमवार
चौघड़िया से –
प्रातः 06.26.47 से 07.52.21 तक (अमृत)
प्रातः 09.17.56 से 10.43.30 तक (शुभ)
दोप. 01.34.39 से 03.00.14 तक (चर)
दोप. 03.00.15 से 04.25.48 तक (लाभ)
दोप. 04.25.49 से सांयः 05.51.23 तक (अमृत)
सांयः 05.51.24 से 07.25.52 तक (चर)
रात्रि 10.34.50 से 12.09.19 तक (लाभ)
रात्रि 01.43.48 से 03.18.17 तक (शुभ)
रात्रि 03.18.18 से 04.52.46 तक (अमृत)
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शुभ स्थिर लग्न से –
वृश्चिक – प्रातः 08.31.17 से 10.47.03 तक
(नवांश – प्रातः 09.32.02 से 09.47.10 तक)
कुम्भ – दोप. 02.39.09 से 04.12.26 तक
(नवांश – दोप. 03.21.40 से 03.31.58 तक)
वृषभ – सांयः 07.23.55 से रात्रि 09.22.15 तक
(नवांश – रात्रि 08.14.08 से 08.27.17 तक)
सिंह – रात्रि 01.51.23 से 04.02.48 तक
(नवांश – रात्रि 02.50.18 से 03.04.52 तक)
3. शुभ अभिजित मुहूर्त –
प्रातः 11.45.05 से दोप. 12.33.05 तक
4. शुभ प्रदोष वेला –
सांयः 05.51.23 से 07.57.21 तक
5. शुभ महानिशीथ काल –
रात्रि 11.45.18 से 12.33.18 तक
अतिविशिष्ट मुहूर्त –
जिसमें शुभ चौघड़िया, स्थिर लग्न व लग्न नवांश, गुरु, शुक्र व शनि की होरा, प्रदोष वेला, महानिशीथ एवं अभिजीत काल का समावेश है-
प्रातः 07.26 मि. से 07.52 मि. तक
प्रातः 08.31 मि. से 09.26 मि. तक
प्रातः 09.32 मि. से 09.47 मि. तक
प्रातः 11.45 मि. से दोप. 12.26 मि. तक
दोप. 02.39 मि. से 03.26 मि. तक
दोप. 03.31 मि. से 04.12 मि. तक
सांयः 07.23 मि. से 07.57 मि. तक
रात्रि 08.14 मि. से 08.17 मि. तक
रात्रि 11.45 मि. से 12.09 मि. तक
रात्रि 01.43 मि. से 02.26 मि. तक
रात्रि 02.50 मि. से 03.04 मि. तक
ज्योतिर्विद – पं. गुलशन अग्रवाल
प्रबंधक – जय महाकाली मंदिर, खजराना, इन्दौर





