भोपाल: UGC (University Grants Commission) के नए इक्विटी रेगुलेशंस (Equity Regulations) को लेकर कैंपस में छात्रों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। इस बीच संसदीय समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह ने स्थिति स्पष्ट की और छात्रों को भ्रम से बाहर आने की अपील की।
झूठी शिकायत पर सजा हटाने का फैसला UGC का था
दिग्विजय सिंह ने कहा कि संसदीय समिति ने कभी यह नहीं कहा कि झूठी शिकायत करने वाले छात्रों पर सजा का प्रावधान हटाया जाए। यह फैसला UGC ने अपनी मर्जी से लिया। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि “नए नियमों के कारण पैदा हुआ भ्रम और गुस्सा संसदीय समिति की वजह से नहीं, बल्कि UGC के अपने फैसलों से है।”
Note on UGC Equity Regulations
● The mothers of Payal Tadvi and Rohith Vemula – and the prompting of the Supreme Court – Modi Government and the UGC came with draft UGC Equity Regulations in February 2025.
● In December 2025, the Parliamentary Standing Committee on Education…— Digvijaya Singh (@digvijaya_28) January 28, 2026
भेदभाव से सुरक्षा का निर्णय भी UGC का था
जनरल कैटेगरी के छात्रों को नियमों से बाहर रखने का निर्णय भी UGC ने किया। संसदीय समिति ने केवल यह सिफारिश की थी कि UGC को भेदभावपूर्ण व्यवहार की विस्तृत सूची बनानी चाहिए, ताकि नियमों में स्पष्टता हो और कानून का दुरुपयोग रोका जा सके।
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शिक्षा मंत्रालय की भूमिका अहम
दिग्विजय सिंह ने कहा कि अगर UGC ने भेदभाव को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया होता, तो ‘फर्जी केस’ का डर ही नहीं पैदा होता। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब इस मुद्दे को सुलझाने की जिम्मेदारी शिक्षा मंत्रालय पर है।
छात्र नेताओं से अपील
दिग्विजय सिंह ने सभी छात्र नेताओं और विश्वविद्यालयों को अपील की कि वे नियमों को सही तरीके से समझें और बिना तथ्य की अफवाहों में न फंसे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि नियमों में संशोधन और स्पष्टता लाने का काम अब शिक्षा मंत्रालय करेगा।













