Dhirendra Krishna Shastri: कांवड़ यात्रा को लेकर मौलाना साजिद रशीदी के बयान पर विवाद बढ़ता जा रहा है। कांवड़ियों को कथित तौर पर आतंकवादी बताए जाने के बाद अब पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। बागेश्वर धाम में आयोजित दरबार के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि किसी एक घटना या व्यक्ति की कथित गलती के आधार पर सभी कांवड़ियों को एक ही नजर से देखना उचित नहीं है।उन्होंने कहा कि देशभर में करोड़ों श्रद्धालु शांतिपूर्ण तरीके से कांवड़ यात्रा निकालते हैं। ऐसे में सभी कांवड़ियों को आतंकवादी कहना गलत है।
धीरेंद्र शास्त्री ने मौलाना साजिद रशीदी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि किसी घटना में उपद्रव या हिंसा हुई है तो उसमें शामिल लोगों को कांवड़िया मानना जरूरी नहीं है। उन्होंने कहा कि बसों या वैन पर पत्थर फेंकने अथवा ट्रकों को लूटने वाले लोग सच्चे कांवड़िया नहीं हो सकते।उन्होंने कहा कि सभी कांवड़ियों को एक जैसा नहीं समझना चाहिए और धार्मिक यात्रा में शामिल करोड़ों श्रद्धालुओं को आतंकवादी कहना उचित नहीं है।
‘अपनी भाषा सुधारें, सभी श्रद्धालुओं को आतंकवादी मत कहिए’
धीरेंद्र शास्त्री ने अपने बयान में मौलाना को निशाने पर लेते हुए भाषा सुधारने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति या समूह ने गलत काम किया है तो उसके आधार पर पूरे समुदाय या यात्रा में शामिल सभी लोगों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि इस तरह के बयान देने से पहले सोच-समझकर बोलना चाहिए।
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मौलाना साजिद रशीदी ने क्या कहा था?
दरअसल, यह विवाद मौलाना साजिद रशीदी के 6 अगस्त के कथित बयान के बाद शुरू हुआ। रशीदी ने कांवड़ यात्रा के दौरान कथित तौर पर उपद्रव, तोड़फोड़ और पुलिस के साथ हिंसा जैसी घटनाओं का जिक्र करते हुए कुछ कांवड़ियों की तुलना आतंकवादियों और नशेड़ियों से की थी।उनका कहना था कि सड़कों पर गुंडागर्दी, तोड़फोड़ या पुलिस पर हमला करने वाले लोग भगवान शिव के भक्त नहीं हो सकते।इस बयान के सामने आने के बाद हिंदू संगठनों की ओर से विरोध जताया गया। मामले को लेकर हिंदू संघर्ष समिति की ओर से शिकायत/मामला दर्ज कराने की जानकारी भी सामने आई है।
धीरेंद्र शास्त्री ने कहा- एक घटना से सभी कांवड़ियों को न आंकें
धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि कांवड़ यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु आस्था के साथ शामिल होते हैं। ऐसे में किसी एक घटना में शामिल लोगों के कथित आचरण के आधार पर पूरी कांवड़ यात्रा या सभी कांवड़ियों को गलत नजर से देखना उचित नहीं है।उन्होंने कहा कि धार्मिक यात्राओं में शामिल लोगों के प्रति बयान देते समय जिम्मेदारी और संयम बरतना जरूरी है। इस बयान के बाद कांवड़ यात्रा को लेकर चल रहा विवाद अब और गरमा गया है।





