Dabra News :डबरा.संदीप शर्मा : जहां एक ओर “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” के नारे गूंज रहे हैं, वहीं डबरा में शिक्षा के नाम पर चल रहे कई सरकारी और निजी स्कूल मौत के कुएं बन चुके हैं। मासूम बच्चे रोज़ मौत की दहलीज़ लांघकर इन इमारतों में जाते हैं, लेकिन प्रशासन अब तक गहरी नींद में है। क्या जिम्मेदार किसी बड़ी त्रासदी के बाद ही जागेंगे?
Dabra News :जर्जर स्कूल भवन: कब्र बनते क्लासरूम!
Dabra News :डबरा क्षेत्र में कई स्कूल ऐसी बिल्डिंगों में चल रहे हैं, जो बारिश का पहला पानी भी नहीं झेल सकते। छत से पानी टपकता है.दीवारों में दरारें ऐसी मानो मौत दस्तक दे रही हो.बच्चों के लिए कोई सुरक्षा इंतजाम नहीं.क्लासरूम तालाब बन जाते हैं, लेकिन अफसरों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगती।
Dabra News :चलती मौतें: स्कूल बस या मोबाइल श्मशान?
प्राइवेट स्कूल बसों की हालत किसी कबाड़ से कम नहीं:
ना फिटनेस सर्टिफिकेट
ना फर्स्ट-एड बॉक्स
ना इमरजेंसी गेट
ना अग्निशमन यंत्र
Dabra News :ये बसें बच्चों को स्कूल नहीं, सीधे काल की ओर ले जा रही हैं।
Dabra News :घर-स्कूल का खेल: शिक्षा या मज़ाक?
कई तथाकथित “स्कूल” असल में मकानों के कमरों में चल रहे हैं।
ना बेंच
ना ब्लैकबोर्ड
ना टॉयलेट
ना पीने का साफ पानी
इन हालात में बच्चियों की सुरक्षा और शिक्षा दोनों खतरे में हैं। क्या यही है सरकारी अभियान का असली चेहरा?
प्रशासन की संवेदनहीनता: अधिकारी या अहंकारी?
जब पत्रकार ने BRC विवेक चौखुटिया से इस गंभीर मुद्दे पर सवाल किया —
तो जवाब की जगह झुंझलाहट मिली, जिम्मेदारी नहीं!
क्या ये अधिकारी हैं या अहंकार के पुतले?
दूसरे राज्यों से भी नहीं सीखा सबक!
राजस्थान, ग्वालियर में स्कूल भवन गिरने से मासूम बच्चों की मौत हो चुकी है।
फिर भी डबरा प्रशासन आंख मूंदे बैठा है।
क्या यहां भी किसी बच्चे की लाश गिरने का इंतजार है?
जनता पूछ रही है कड़े सवाल:
कब मरम्मत होंगी जर्जर स्कूल इमारतें?
कब बंद होंगी खटारा और बगैर फिटनेस वाली स्कूल बसें?
बच्चों की जान की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा?
क्या शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार बच्चों की ज़िंदगी से भी बड़ा है?
हमारी पत्रकारिता रुकेगी नहीं!
हमारा मिशन सिर्फ खबर चलाना नहीं —
हम सवाल करेंगे, जब तक जवाब न मिले!
हम लड़ेंगे, जब तक बदलाव न हो!
हर मां-बाप की आवाज़ बनकर हम डटकर खड़े हैं।
अब जनता की बारी — दबाव बनाइए!
प्रशासन को अब फैसला करना होगा:
या तो हर बच्चे की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाओ,
या कुर्सी छोड़ो और शर्म से सिर झुकाओ!
Dabra News :”ये सिर्फ एक रिपोर्ट नहीं, ये हर उस अभिभावक की चीख है, जो अपने बच्चे को सुबह हंसता खेलता स्कूल भेजता है — और शाम को सही सलामत लौटने की दुआ करता है.













