बिलासपुर – बिलासपुर हाई कोर्ट ने अवकाश के दिन याचिका पर सुनवाई कर दुर्गेश नंदिनी को राहत दी। कोर्ट ने छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) को निर्देश दिया कि उनका प्रवेश पत्र तत्काल जारी किया जाए, ताकि वे सिविल जज भर्ती परीक्षा में शामिल हो सकें।
रायपुर निवासी दुर्गेश नंदिनी, जो सहायक लोक अभियोजन अधिकारी (ADPO) के पद पर कार्यरत हैं, ने परीक्षा के लिए आवेदन किया था। लेकिन लोक सेवा आयोग ने उनका प्रवेश पत्र स्टेट बार काउंसिल में नामांकन न होने के आधार पर रोका।
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हाईकोर्ट में चुनौती और फैसला:
दुर्गेश नंदिनी ने अपने वकीलों आर.एस. पटेल और आशीष साहू के माध्यम से हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की। न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास की एकलपीठ ने अवकाश के दिन ही सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के Urvashi Kaur मामले का हवाला देते हुए कहा कि केवल स्टेट बार काउंसिल में नामांकित न होना परीक्षा में शामिल होने से रोकने का कारण नहीं बनता।
इस आधार पर कोर्ट ने आयोग को आदेशित किया कि याचिकाकर्ता का प्रवेश पत्र तत्काल जारी किया जाए।
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यह फैसला न केवल दुर्गेश नंदिनी के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि उन अभ्यर्थियों के लिए भी उदाहरण है जिन्हें प्रशासनिक या तकनीकी कारणों से अपने संवैधानिक अधिकारों से वंचित किया जाता है। हाई कोर्ट का यह कदम दर्शाता है कि न्यायपालिका अवकाश के दिन भी अधिकारों की रक्षा के लिए तत्पर रहती है।











