धर्मांतरण बनाम मतांतरण : रायपुर : छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण और मतांतरण को लेकर बीते चार वर्षों में 102 विवाद सामने आए हैं। राज्य के कई जिलों में हिंदू और ईसाई समाज के बीच टकराव की स्थिति बनी है। ताजा मामला दुर्ग रेलवे स्टेशन का है, जहां 25 जुलाई को 2 मिशनरी सिस्टर्स को गिरफ्तार किया गया। इन पर मानव तस्करी और धर्मांतरण के आरोप लगे हैं। यह मामला संसद और सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गया है।
4 बड़े केस जो सुर्खियों में रहे
- दुर्ग स्टेशन पर मिशनरी सिस्टर्स की गिरफ्तारी
25 जुलाई 2025 को दुर्ग रेलवे स्टेशन पर दो मिशनरी ननों और एक युवक को तीन आदिवासी युवतियों को कथित रूप से आगरा ले जाकर बेचने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। इस गिरफ्तारी के विरोध में संसद से लेकर सड़क तक विरोध प्रदर्शन हुए। - रायपुर की चंगाई सभा में देवी-देवताओं के अपमान का आरोप
31 जनवरी 2025 को रायपुर के पंडरी इलाके में हुई चंगाई सभा में कथित रूप से हिंदू देवी-देवताओं का अपमान और 4 हिंदू परिवारों का धर्मांतरण कराए जाने का आरोप लगा। पादरी कीर्ति केशरवानी और दो अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई। - बिलासपुर में प्रार्थना सभा की आड़ में धर्मांतरण का मामला
28 जुलाई को बिलासपुर के प्रीति भवन में दो महिलाओं द्वारा प्रार्थना सभा के नाम पर धर्मांतरण की कोशिश का आरोप लगा। पुलिस ने शिकायत के बाद दोनों महिलाओं को हिरासत में लिया। - रायपुर में अस्थाई चर्च का घेराव
27 जुलाई को रायपुर के WRS कॉलोनी में रेलवे की जमीन पर बने अस्थाई चर्च का बजरंग दल ने घेराव किया और आरोप लगाया कि यहां प्रार्थना सभा की आड़ में मतांतरण किया जा रहा है। विवाद के बाद प्रशासन ने भवन का उपयोग बंद करने का निर्देश दिया।
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किन जिलों में ज्यादा विवाद
धर्मांतरण को लेकर कोरबा, बलरामपुर, महासमुंद, दुर्ग और बिलासपुर सबसे अधिक विवादग्रस्त जिले हैं। वहीं सरगुजा, बस्तर और सूरजपुर में comparatively कम मामले सामने आए हैं। पिछले एक साल में 23 नई FIR दर्ज की गई हैं।
ईसाई समुदाय का पक्ष: अरुण पन्नालाल, अध्यक्ष – छत्तीसगढ़ क्रिश्चियन फोरम
- धर्मांतरण का दावा बेबुनियाद: 1950 में ईसाई समाज की आबादी 3% थी, अब 2.6% रह गई है। कोई अवैध धर्मांतरण नहीं हो रहा।
- FIR का मतलब दोष नहीं: FIR का मतलब ये नहीं कि अपराध हुआ है, सजा के मामलों की संख्या देखें तो हकीकत साफ होगी।
- प्रलोभन और जबरदस्ती गलत: हम धर्मांतरण के नाम पर प्रलोभन नहीं देते। कोई मसीही समाज का सदस्य मंदिर जाए तो आरोप लगते हैं।
- दोहरा लाभ का आरोप गलत: सरकार भ्रम फैला रही है कि धर्मांतरण के बाद भी आदिवासी सुविधाएं ले रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि धर्म बदलने से जाति नहीं बदलती।
बीजेपी का पक्ष: गौरीशंकर श्रीवास, प्रवक्ता – भाजपा
- धर्मांतरण नहीं, प्रचार का दुरुपयोग: धर्म प्रचार के नाम पर जबरन धर्मांतरण हो रहा है। मिशनरियों की गतिविधियां भयावह हैं।
- सरकार कड़ी कार्रवाई कर रही: बस्तर जैसे क्षेत्रों में आदिवासियों के धर्मांतरण के बाद तस्करी तक की बात सामने आई है।
- बीजेपी सड़क पर उतरेगी: संगठन और पार्टी दोनों इस मुद्दे को लेकर कार्य योजना के साथ मैदान में उतरेंगे।
- छत्तीसगढ़ में 3 तरह के आदिवासी: प्रकृति पूजक, हिंदू ट्राइबल और ईसाई आदिवासी। पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में ग्राम सभाओं को विशेष अधिकार हैं।
- ग्राम सभा का निर्णय: बस्तर की कई ग्राम सभाओं ने प्रस्ताव पारित कर ईसाई धर्म के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया है। यह मामला कोर्ट में लंबित है।
- विवाद का कारण: जब गांव में बिना अनुमति धर्म प्रचार होता है, तो स्थानीय लोग विरोध करते हैं जिससे टकराव होता है।
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धर्मांतरण और मतांतरण : क्या फर्क है?
- धर्मांतरण: विधिक प्रक्रिया जिसके तहत व्यक्ति नया धर्म अपनाता है और इसकी सूचना जिला प्रशासन को देता है। इसमें सरनेम और पहचान बदलना पड़ता है।
- मतांतरण : केवल धार्मिक विचार या विश्वास बदलना, लेकिन कानूनी रूप से कोई बदलाव नहीं होता। इसका सरकारी रिकॉर्ड भी नहीं बनता।
नया कानून: छत्तीसगढ़ धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम
छत्तीसगढ़ में 1968 से धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम लागू है। सरकार अब इस कानून को और सख्त करने की तैयारी में है। 2024 में नया ड्राफ्ट तैयार किया गया है, जिसमें 17 बिंदु शामिल हैं। इसके तहत:
- धर्मांतरण से 60 दिन पहले सूचना देनी होगी।
- धर्मांतरण के बाद 60 दिन में डिक्लेरेशन जरूरी होगा।
- जिला प्रशासन को उपस्थित होकर पुष्टि करनी होगी।
- उल्लंघन पर धर्मांतरण को अवैध घोषित किया जा सकता है।
ईसाई मतदाताओं की भूमिका
राज्य की 90 विधानसभा सीटों में से 19 सीटों पर ईसाई मतदाताओं की अहम भूमिका है, खासकर जशपुर जिले में। यहां उनका वोट विधानसभा की हार-जीत तय करता है।













