coal scam : रायपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित कोयला घोटाला मामले में आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व IAS अधिकारी सौम्या चौरसिया के निजी सचिव जयचंद कोसले को गिरफ्तार किया है। सोमवार को उन्हें ACB/EOW की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां पुलिस ने उन्हें 14 दिन की रिमांड पर लेने की मांग की।
coal scam : जयचंद कोसले पर आरोप है कि उन्होंने सौम्या चौरसिया के निज सचिव के रूप में कार्य करते हुए कोयला घोटाले से करीब 50 लाख रुपये की अवैध कमाई की।
coal scam : 10 जगहों पर EOW की छापेमारी
coal scam : EOW ने रविवार को कोयला और शराब घोटाले से जुड़े मामलों में रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग के 10 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। इनमें शराब कारोबारी अवधेश यादव और जयचंद कोसले के ठिकाने भी शामिल थे। छापों के दौरान दस्तावेज, मोबाइल फोन, नकदी और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए। कार्रवाई देर रात 11:30 बजे तक चली।
coal scam : क्या है कोयला घोटाला?
coal scam : ED की जांच में सामने आया कि जुलाई 2020 से जून 2022 के बीच राज्य में कोयला परिवहन के नाम पर प्रत्येक टन पर ₹25 की अवैध लेवी वसूली गई। यह अवैध वसूली खनिज विभाग के आदेश के बाद की गई थी, जिसे तत्कालीन निदेशक IAS समीर बिश्रोई ने जारी किया था।
coal scam : मुख्य साजिशकर्ता (किंगपिन) कोल व्यापारी सूर्यकांत तिवारी को माना जा रहा है। उसने जिन व्यापारियों से पैसे लिए, उन्हें ही परमिट और पास जारी किए जाते थे। इस घोटाले में अब तक करीब ₹570 करोड़ की अवैध वसूली की बात सामने आई है।
coal scam : अवैध कमाई कहां खर्च हुई?
coal scam : जांच में पता चला है कि इस अवैध राशि का उपयोग सरकारी अधिकारियों और राजनेताओं को रिश्वत देने तथा चुनावी खर्चों में किया गया। इसके अलावा, कई चल-अचल संपत्तियाँ भी खरीदी गईं।
coal scam : छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: एक नजर
coal scam : 2019 से 2022 के बीच लाइसेंसी शराब दुकानों पर डुप्लीकेट होलोग्राम लगाकर अवैध शराब बेची गई। इस घोटाले से सरकार को करोड़ों का नुकसान हुआ। PHSE कंपनी (नोएडा) को अवैध रूप से टेंडर दिया गया, जबकि वह पात्र नहीं थी।ED की जांच में इस घोटाले से जुड़े नाम सामने आए:
coal scam : अरुणपति त्रिपाठी (CSMCL के पूर्व MD)
coal scam : बिजनेसमैन अनवर ढेबर और अनिल टुटेजा
coal scam : आगे चलकर पूर्व आबकारी मंत्री और कांग्रेस विधायक कवासी लखमा का नाम भी आया, जिन्हें कथित तौर पर हर महीने कमिशन मिलता था।













