Rihand Dam : मृत मछलियों से पटी रिहंद डैम की सतह, ग्रामीणों ने प्रशासन से मांगी तत्काल जांच

VIKASH KHALKHO

Rihand Dam : सिंगरौली। सिंगरौली जिले से एक गंभीर पर्यावरणीय और जन-स्वास्थ्य चिंता का मामला सामने आया है। स्थानीय ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि जिले के जीवनदायिनी रिहंद डैम में एनटीपीसी (NTPC) की ओर से राखड़ (फ्लाई ऐश) और रसायन मिश्रित पानी छोड़ा जा रहा है, जिसके कारण डैम का पारिस्थितिकी तंत्र बुरी तरह प्रभावित हो गया है। सबसे बड़ी चिंता का विषय यह है कि इस प्रदूषण के चलते रिहंद डैम में बड़ी संख्या में मछलियों की मौत हो रही है। डैम की सतह पर तैरती हजारों मृत मछलियों के हृदय विदारक दृश्य ने स्थानीय लोगों, खासकर मछुआरों और तटवर्ती निवासियों में, दहशत और गहरी चिंता दोनों बढ़ा दी है।

Rihand Dam : ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप है कि एनटीपीसी द्वारा छोड़े जा रहे राखड़युक्त और रसायन मिश्रित पानी ने रिहंद डैम के जलजीवों के जीवन को संकट में डाल दिया है। उनका कहना है कि यह प्रदूषण न सिर्फ जलीय जीवन को नष्ट कर रहा है, बल्कि डैम के पानी को तेजी से दूषित कर रहा है। रिहंद डैम का यह प्रदूषण अत्यंत गंभीर इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि इसी डैम का पानी नगर निगम की पाइपलाइन के माध्यम से लाखों लोगों के घरों तक पेयजल के रूप में पहुँचता है। यदि इस पानी में किसी भी प्रकार का रासायनिक प्रदूषण शामिल है, तो यह सीधे तौर पर क्षेत्र की एक विशाल आबादी के जन-स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा बन सकता है।

Rihand Dam : ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से इस गंभीर मामले की तत्काल और व्यापक जांच कराने की मांग की है। उनकी मुख्य मांगों में एनटीपीसी के डिस्चार्ज पाइंट की गहन पड़ताल करना और रिहंद डैम के पानी का वैज्ञानिक परीक्षण (Chemical and Biological Testing) कराना शामिल है, ताकि पानी में मौजूद प्रदूषण की सही मात्रा और प्रकृति का पता चल सके। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को इस लापरवाही पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए और प्रदूषण रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए ताकि इंसानों और जलजीवों, दोनों के जीवन की रक्षा हो सके।

Rihand Dam : इस संबंध में जब एनटीपीसी कंपनी के जन संपर्क अधिकारी शंकर सुब्रमण्यम से मोबाइल फोन के माध्यम से संपर्क किया गया, तो उन्होंने इन आरोपों को पुराना बताते हुए कहा कि “अभी ऐसा कुछ नहीं हुआ है।” हालांकि, डैम की सतह पर तैरती हजारों मृत मछलियों की तस्वीरें और स्थानीय निवासियों का डर कंपनी के इस दावे के विपरीत, एक बड़ी और गंभीर समस्या की ओर साफ इशारा कर रहा है। प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस विरोधाभास की सच्चाई जानने के लिए जल्द से जल्द हस्तक्षेप करना आवश्यक है।

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विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।
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