चीन की नई रेल परियोजना भारत के लिए बढ़ी चिंता, LAC के पास अक्साई चिन से होकर गुजरेगी लाइन

नई दिल्ली – एक तरफ जहां अमेरिका के टैरिफ के मुद्दे पर चीन भारत के साथ खड़ा दिखाई दे रहा है, वहीं दूसरी तरफ वह एक ऐसी बड़ी रेल परियोजना शुरू करने जा रहा है, जो भारत के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है। यह रेल लाइन भारत के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास से होकर गुजरेगी और तिब्बत को शिनजियांग से जोड़ेगी। सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह परियोजना भारत के अक्साई चिन क्षेत्र से होकर जाएगी, जिस पर चीन ने कब्जा कर रखा है।

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रेल परियोजना का विवरण

चीन 2008 से इस नई रेल लाइन की योजना बना रहा था, जिसे अब ‘शिनजियांग-तिब्बत रेलवे कंपनी (XTRC)’ के माध्यम से पूरा किया जाएगा। लगभग 2000 किलोमीटर लंबी यह रेल लाइन शिनजियांग के होतान से तिब्बत के ल्हासा तक जाएगी। यह तिब्बत के शिगात्से से शुरू होगी और नेपाल की सीमा के साथ उत्तर-पश्चिम में अक्साई चिन से होते हुए शिनजियांग के होतान तक पहुंचेगी।

यह रेल लाइन कुनलुन, कराकोरम, कैलाश और हिमालय जैसी कठिन पर्वत श्रृंखलाओं से होकर गुजरेगी, जहां औसत ऊंचाई 4500 मीटर से अधिक होगी। चीन का लक्ष्य 2035 तक ल्हासा को केंद्र बनाकर 5000 किलोमीटर का रेल नेटवर्क तैयार करना है।

भारत के लिए चिंता के दो प्रमुख कारण

  1. अक्साई चिन विवाद: अक्साई चिन भारत का अभिन्न हिस्सा है, लेकिन 1950 के दशक से चीन के कब्जे में है। 1950 के दशक में चीन ने इसी क्षेत्र में शिनजियांग-तिब्बत हाईवे (G219) बनाया था, जो 1962 के भारत-चीन युद्ध का एक प्रमुख कारण बना था। अब इस क्षेत्र से गुजरने वाली नई रेल लाइन भारत की संप्रभुता के लिए एक और बड़ा खतरा है।
  2. सीमा सुरक्षा: यह रेल लाइन LAC के पास चीन को अपनी सेना और सैन्य उपकरणों को बहुत तेजी से तैनात करने की क्षमता देगी। इससे अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम जैसे संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों में तनाव और बढ़ सकता है।

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डोकलाम और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों तक विस्तार

चीन की यह रेल लाइन सिर्फ अक्साई चिन तक ही सीमित नहीं है। वह इसे अरुणाचल प्रदेश की सीमा के पास ल्हासा-न्यिंगची रूट से आगे चेंगदू तक भी बढ़ाने की योजना बना रहा है, जो चीन का एक प्रमुख सैन्य केंद्र है। इसके अलावा, नेपाल-तिब्बत सीमा पर ग्यिरोंग और चंबी घाटी में यदोंग काउंटी तक भी रेल लाइन पहुंचेगी। चंबी घाटी वही संवेदनशील क्षेत्र है जहां 2017 में डोकलाम विवाद हुआ था।

भारत ने फिलहाल इस परियोजना पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन चीन के इस आक्रामक कदम का मुकाबला करने के लिए भारत भी अपनी सीमा पर बुनियादी ढांचे को तेजी से मजबूत कर रहा है।

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