MP News: छिंदवाड़ा। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले से सरकारी व्यवस्था की गंभीर लापरवाही का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक 14 वर्षीय बालक, जो पूरी तरह जीवित और स्वस्थ है, उसे सरकारी दस्तावेजों में मृत घोषित कर दिया गया। हैरानी की बात यह है कि इस गलती का खुलासा घटना के करीब तीन महीने बाद तब हुआ, जब आंगनवाड़ी कार्यकर्ता मुआवजा प्रक्रिया के लिए सत्यापन करने पीड़ित परिवार के घर पहुंची।
जैसे ही परिवार को पता चला कि उनका बेटा सरकारी रिकॉर्ड में मृत दर्ज है, उनके होश उड़ गए। अब पीड़ित परिवार अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काट रहा है, लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद भी रिकॉर्ड में सुधार नहीं किया गया है।
सर्पदंश की आशंका में अस्पताल में हुआ था भर्ती
मामला परासिया विकासखंड के ग्राम कचराम का है। जानकारी के अनुसार, 14 वर्षीय नैतिक पवार करीब तीन महीने पहले खेत में खेलते समय किसी जंतु के काटने से बीमार हो गया था। परिजन पहले उसे परासिया सिविल अस्पताल और बाद में जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने सर्पदंश की आशंका के चलते उसका उपचार किया।कुछ दिनों तक इलाज चलने के बाद नैतिक पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने घर लौट आया और सामान्य जीवन जीने लगा।
आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के पहुंचने पर खुली पोल
MP News: घटना के लगभग तीन महीने बाद गांव की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता नैतिक के घर पहुंचीं। उन्होंने परिजनों से कहा कि सरकारी रिकॉर्ड में नैतिक की सर्पदंश से मौत दर्ज है और मुआवजा प्रकरण के लिए दस्तावेजों का सत्यापन करना है।यह सुनकर परिवार स्तब्ध रह गया, क्योंकि जिस बच्चे को सरकारी रिकॉर्ड में मृत बताया गया था, वह उनके सामने पूरी तरह स्वस्थ खड़ा था।
पिता बोले- मेरा बेटा जिंदा है, फिर मृत कैसे घोषित कर दिया?
नैतिक के पिता हुकुमचंद पवार ने बताया कि खेत में काम के दौरान उनके बेटे को किसी जंतु ने काट लिया था। शुरुआत में सर्पदंश की आशंका के चलते उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन बाद में खेत में मौजूद लोगों ने बताया कि उसे सांप नहीं, बल्कि किसी अन्य छोटे जीव (चूहे/चुहिया) ने काटा था।
उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल में सर्पदंश का इलाज किया गया और रिकॉर्ड में कई जानकारियां भी गलत दर्ज कर दी गईं। सबसे बड़ी लापरवाही यह रही कि नैतिक को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया।
तीन महीने से नहीं सुधरी सरकारी गलती
MP News: परिजनों का कहना है कि गलती सामने आने के बाद उनसे लिखित आवेदन लिया गया था, जिसमें यह स्पष्ट किया गया कि उनका बेटा जीवित है और उसका नाम मृतकों की सूची से हटाया जाए। लेकिन आवेदन देने के बावजूद तीन महीने बीत चुके हैं, फिर भी सरकारी रिकॉर्ड में कोई सुधार नहीं किया गया।परिवार का कहना है कि इस लापरवाही के कारण उन्हें मानसिक परेशानी झेलनी पड़ रही है और वे लगातार अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने जांच का दिया भरोसा
MP News: मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने स्वीकार किया कि रिकॉर्ड में त्रुटि की शिकायत मिली है। अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और यदि रिकॉर्ड में गलती पाई जाती है तो उसे तत्काल सुधारते हुए जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना सरकारी रिकॉर्ड के रखरखाव और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि जांच के बाद प्रशासन इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई करता है और पीड़ित परिवार को कब तक राहत मिलती है।




