Jhiram Ghati Massacre Political Conspiracy Investigation: राजनीतिक षड्यंत्र की जांच अब तक नहीं हुई, सिर्फ छोटे मोहरों पर कार्रवाई; एनआईए फैसले पर बोले भूपेश बघेल

VIKASH KHALKHO

रायपुर। Nishaanebaz.com-Bhupesh Baghel Statement Jhiram Ghati NIA Verdict: झीरम घाटी नक्सली नरसंहार मामले में जगदलपुर की विशेष एनआईए (NIA) अदालत द्वारा 10 आरोपियों को दोषी ठहराए जाने के फैसले पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पूर्व सीएम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर पोस्ट करते हुए इस फैसले को “अधूरा न्याय” करार दिया है। उन्होंने कहा कि झीरम घाटी में रचा गया षड्यंत्र लोकतंत्र के इतिहास के सबसे बड़े राजनीतिक नरसंहारों में से एक था। ऐसे में सिर्फ निचले स्तर के 10 नक्सलियों को सजा मिलना किसी भी सूरत में पूरा न्याय नहीं कहा जा सकता।

भूपेश बघेल ने एनआईए की जांच प्रणाली पर सीधे सवाल खड़े करते हुए कहा कि जांच एजेंसी ने खुद स्वीकार किया था कि 25 मई 2013 को हुए इस भीषण हमले में करीब 200 नक्सली शामिल थे। एजेंसी ने शुरुआत में 39 लोगों को आरोपी बनाया था, लेकिन अपनी घोर लापरवाही के कारण वह 10 से अधिक मुख्य आरोपियों को पकड़ने में नाकाम रही। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए पूछा कि किस दबाव या इशारे पर प्राथमिकी (FIR) से नक्सलियों के शीर्ष नेताओं और मास्टरमाइंड्स के नाम हटा दिए गए?

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पूर्व मुख्यमंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि झीरम कांड के पीछे रचे गए वृहद ‘राजनीतिक षड्यंत्र’ की जांच आज तक शुरू ही नहीं हो सकी। उन्होंने स्पष्ट किया कि घटना के बाद गठित जांच आयोग (जस्टिस प्रशांत मिश्रा आयोग) का दायरा केवल सुरक्षा व्यवस्था की चूक और कमियों का आकलन करना था, न कि आपराधिक साजिश में शामिल दोषियों को चिन्हित कर सजा दिलाना। कांग्रेस पार्टी और पीड़ित परिवार शुरुआत से ही राजनीतिक साजिश के एंगल से आपराधिक जांच की मांग कर रहे हैं, जिसे एनआईए ने पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया।

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अपने बयान में बघेल ने साल 2020 का जिक्र करते हुए बताया कि शहीद पूर्व विधायक उदय मुदलियार के बेटे जितेंद्र मुदलियार की शिकायत पर राज्य पुलिस ने आपराधिक षड्यंत्र की जांच के लिए दूसरी एफआईआर दर्ज की थी। लेकिन एनआईए इसके खिलाफ हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक गई। नवंबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने एनआईए की याचिका खारिज कर दी, जिससे राज्य सरकार के लिए जांच का रास्ता साफ हो गया था। बघेल ने आरोप लगाया कि राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद भाजपा सरकार ने इस एफआईआर पर पिछले ढाई सालों से कोई जांच आगे नहीं बढ़ाई, जिससे साफ है कि भाजपा साजिशकर्ताओं को बचाना चाहती है।

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मामले में एनआईए कोर्ट ने जिन 10 नक्सलियों को दोषी ठहराया है, उनमें प्रमला मोडियम, चैतू लेकाम उर्फ मुन्ना, सुमित्रा उर्फ सुमित्रा पुनेम, मुक्का मांडवी, कोसा कवासी, आयता मरकाम, मदकामी देवा, जोगा मदकामी, बनजामी सन्ना और महादेव नाग शामिल हैं। कोर्ट आगामी 16 सितंबर 2026 को इनकी सजा की अवधि तय करेगी। हालांकि, बचाव पक्ष के वकीलों ने फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देने की बात कही है। दूसरी ओर, पूर्व सीएम बघेल का कहना है कि जब तक राजनीतिक षड्यंत्र की निष्पक्ष जांच नहीं होती, झीरम घाटी के शहीदों और उनके परिवारों को सच्चा न्याय नहीं मिल सकता।

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विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।
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