गौरी शंकर गुप्ता/रायगढ़। Nishaanebaz.com-Raigarh Administration Initiative: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सुशासन में प्रशासनिक कसावट लाने, जनसमस्याओं के त्वरित निराकरण और शासकीय सेवाओं को आम नागरिकों के सीधे करीब पहुंचाने की दिशा में रायगढ़ जिला प्रशासन ने एक बेहद महत्वपूर्ण और सराहनीय पहल की है। आगामी 4 नवंबर 2026 से प्रत्येक बुधवार को घरघोड़ा में कलेक्टर का कैंप कोर्ट, जनदर्शन और विभागीय समीक्षा बैठक का आयोजन किया जाएगा। इस नई प्रशासनिक व्यवस्था से दूरस्थ अंचलों के नागरिकों को छोटे-छोटे कार्यों और राजस्व अपीलों के लिए जिला मुख्यालय के चक्कर काटने की लंबी परेशानी से बड़ी राहत मिलेगी।
75 से 100 किलोमीटर की दूरी तय करने से मिलेगी मुक्ति
रायगढ़ जिले के घरघोड़ा, धरमजयगढ़ और लैलूंगा क्षेत्र के कई ग्रामीण इलाके और गांव जिला मुख्यालय से लगभग 75 से 100 किलोमीटर दूर स्थित हैं। ऐसे में राजस्व मामलों की सुनवाई, अपील दायर करने या अपनी शिकायतों के निराकरण के लिए यहां के नागरिकों को भारी कठिनाइयों और लंबी दूरी तय करके जिला मुख्यालय आना पड़ता था। आम जनता की इस परेशानी को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने क्षेत्र में ही प्रशासनिक सेवाएं और न्याय सुलभ कराने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इस नई व्यवस्था के तहत कलेक्टर स्वयं क्षेत्र में पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुनेंगे और मामलों के निराकरण की निगरानी करेंगे।
कैंप कोर्ट में होगी अपील प्रकरणों की सुनवाई
घरघोड़ा में आयोजित होने वाले इस विशेष कैंप कोर्ट में घरघोड़ा, धरमजयगढ़ और लैलूंगा क्षेत्र से संबंधित प्रथम एवं द्वितीय अपील के तमाम लंबित प्रकरणों की सुनवाई स्थानीय स्तर पर की जाएगी। इससे संबंधित पक्षकारों को बार-बार जिला मुख्यालय आने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और न्यायालयीन मामलों का निपटारा तेजी से हो सकेगा।
जनदर्शन और विभागीय समीक्षा के साथ सुनिश्चित होगी जवाबदेही
कैंप के दौरान आयोजित होने वाले जनदर्शन में नागरिक सीधे कलेक्टर के समक्ष अपनी व्यक्तिगत समस्याएं और शिकायतें रख सकेंगे। इसके साथ ही, संबंधित अनुभागों के अधिकारियों और विभागीय अमले के साथ विकास कार्यों की प्रगति, शासकीय योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन तथा लंबित प्रकरणों की मैराथन समीक्षा की जाएगी।
इस पूरी व्यवस्था के सुचारू संचालन के लिए कलेक्टर के साथ रीडर, स्टेनो और संबंधित शाखाओं के अधिकारी-कर्मचारी भी नियमित रूप से घरघोड़ा में उपस्थित रहेंगे। जिला प्रशासन की यह पहल न केवल नागरिकों का समय और धन बचाएगी, बल्कि शासन-प्रशासन को जनता के प्रति और अधिक संवेदनशील, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने में मील का पत्थर साबित होगी।