Kodar Link Canal Project: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला! 2550 करोड़ की परियोजना पर लगी कानूनी रोक हटी

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CG NEWS
Bilaspur High Court

Kodar Link Canal Project: कोडार लिंक कैनाल परियोजना को लेकर छत्तीसगढ़ सरकार को बड़ी कानूनी राहत मिली है। राज्य की करीब 2550 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के टेंडर को चुनौती देने वाली याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। अदालत के इस फैसले के बाद परियोजना पर काम शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है। यह योजना गरियाबंद और महासमुंद जिले के दो प्रमुख जलाशयों को जोड़ने के उद्देश्य से तैयार की गई है।

कोडार लिंक कैनाल परियोजना के टेंडर को लेकर भोपाल की एक कंपनी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। कंपनी का दावा था कि टेंडर की पात्रता संबंधी शर्तें उचित नहीं हैं और उनमें बदलाव किया जाना चाहिए। इसी आधार पर कंपनी ने टेंडर प्रक्रिया को चुनौती दी थी।

हाईकोर्ट ने सरकार के पक्ष में सुनाया फैसला
कोडार लिंक कैनाल परियोजना पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि किसी परियोजना के लिए टेंडर की पात्रता और शर्तें तय करना सरकार का अधिकार है। कोर्ट ने यह भी माना कि इस मामले में न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है और याचिका को खारिज कर दिया।
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सकासार और कोडार जलाशय होंगे आपस में जुड़े
कोडार लिंक कैनाल परियोजना के तहत गरियाबंद और महासमुंद जिले के सकासार जलाशय और कोडार जलाशय को आपस में जोड़ा जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे जल प्रबंधन अधिक प्रभावी होगा और सिंचाई सुविधाओं का विस्तार होगा। परियोजना का उद्देश्य किसानों को सालभर बेहतर जल उपलब्ध कराना भी है।

किसानों और जल प्रबंधन को मिलेगा लाभ
कोडार लिंक कैनाल परियोजना पूरी होने के बाद दोनों जिलों में कृषि क्षेत्र को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ने से खेती को मजबूती मिलेगी। साथ ही जल संसाधनों का बेहतर उपयोग और संतुलित वितरण भी संभव हो सकेगा।

अब तेजी से आगे बढ़ेगी परियोजना
कोडार लिंक कैनाल परियोजना पर हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद टेंडर प्रक्रिया से जुड़ी कानूनी बाधा समाप्त हो गई है। माना जा रहा है कि अब सरकार निर्माण कार्य से जुड़ी अगली प्रक्रियाएं तेजी से पूरी करेगी और परियोजना को निर्धारित समय में पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ेगी।यह परियोजना छत्तीसगढ़ की प्रमुख सिंचाई और जल प्रबंधन योजनाओं में शामिल है। इसके पूरा होने से गरियाबंद और महासमुंद जिले के हजारों किसानों को लंबे समय तक लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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