CG Monsoon Session: रायपुर। छत्तीसगढ़ के राजनीतिक और विधायी हलकों से इस वक्त की एक बहुत बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आ रही है। प्रदेश की पांचवीं विधानसभा का आगामी मानसून सत्र आगामी जुलाई महीने में आयोजित किए जाने का निर्णय लिया गया है। संसदीय कार्य विभाग और विधानसभा सचिवालय से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ विधानसभा का यह महत्वपूर्ण मानसून सत्र आगामी तेरह जुलाई से शुरू होकर सत्रह जुलाई दो हजार छब्बीस तक संचालित किया जाएगा। राज्य के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विधानसभा अध्यक्ष यानी स्पीकर डॉ रमन सिंह से इस विषय पर सघन चर्चा करने के बाद अपनी अंतिम सहमति प्रदान कर दी है। इसके साथ ही इस सत्र के आयोजन को लेकर राज्य के महामहिम राज्यपाल की ओर से भी वैधानिक मुहर लगा दी गई है, जिसके तुरंत बाद विधानसभा सचिवालय द्वारा सत्र की विस्तृत अधिसूचना भी आधिकारिक रूप से जारी कर दी गई है।
इस पांच दिवसीय संक्षिप्त सत्र के दौरान सदन के भीतर राज्य सरकार द्वारा कई महत्वपूर्ण विधायी कार्य निपटाए जाने की उम्मीद है।
पांच दिनों के सत्र में आयोजित होंगी कुल पांच बैठकें
विधानसभा के प्रमुख सचिव द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार इस आगामी मानसून सत्र की अवधि के भीतर सदन की कुल पांच बैठकें आयोजित की जाएंगी। चूंकि यह सत्र केवल पांच दिनों का ही होने वाला है, इसलिए इसे बेहद संक्षिप्त लेकिन कार्य संचालन के दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सचिवालय के सूत्रों का कहना है कि सत्र के दौरान प्रत्येक दिन सदन की उत्पादकता बढ़ाने और जनहित के मुद्दों पर सार्थक चर्चा कराने के लिए कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में विशेष रूप से रूपरेखा तैयार की जाएगी। इस पांच दिवसीय बैठकों के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विभिन्न जनहित के मुद्दों, कानून व्यवस्था और विकास कार्यों को लेकर सदन के भीतर तीखी बहस देखने को मिल सकती है।
विपक्ष ने भी सरकार को विभिन्न मोर्चों पर घेरने के लिए अभी से अपनी आंतरिक रणनीतियां बनाना शुरू कर दिया है।
कई महत्वपूर्ण संशोधन विधेयक पटल पर रखे जाने की उम्मीद
संसदीय कार्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार इस आगामी मानसून सत्र में राज्य सरकार की ओर से कुछ बहुत ही महत्वपूर्ण और लंबित संशोधन विधेयक सदन के पटल पर पेश किए जा सकते हैं। इन विधायकों के माध्यम से राज्य के कई पुराने अधिनियमों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं में आवश्यक सुधार किए जाने की योजना है। हालांकि इस बार के सत्र को लेकर जो सबसे बड़ी बात सामने आ रही है, वह यह है कि इस मानसून सत्र के दौरान राज्य सरकार की तरफ से अनुपूरक बजट यानी सप्लीमेंट्री बजट लाए जाने की संभावना बेहद कम दिखाई दे रही है। इसका मुख्य कारण यह माना जा रहा है कि सरकार के पास वर्तमान वित्तीय वर्ष के मुख्य बजट में ही पर्याप्त बजटीय प्रावधान उपलब्ध हैं।
यही वजह है कि इस बार पूरा ध्यान केवल नए संशोधन विधेयकों को पारित कराने और ध्यानाकर्षण प्रस्तावों पर ही केंद्रित रहेगा।
सीएम साय और स्पीकर रमन सिंह की बैठक में बनी सहमति
इस मानसून सत्र के आयोजन की तारीखों को तय करने के लिए पिछले दिनों मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह के बीच एक उच्च स्तरीय समन्वय बैठक आयोजित की गई थी। इस महत्वपूर्ण बैठक में राज्य के तात्कालिक प्रशासनिक कार्यों, लंबित विधेयकों और मानसून के दौरान प्रदेश की स्थिति को ध्यान में रखते हुए जुलाई के दूसरे सप्ताह को सबसे उपयुक्त माना गया। दोनों शीर्ष नेताओं के बीच आपसी सहमति बनने के बाद इस प्रस्ताव की फाइल को तुरंत राजभवन भेजा गया था, जहां राज्यपाल ने बिना किसी विलंब के इस पर अपनी स्वीकृति दे दी। राज्यपाल की मंजूरी मिलते ही विधायी कार्य की गति को बढ़ाने के लिए अधिसूचना जारी कर सभी विधायकों को इसकी सूचना भेज दी गई है।
इस अधिसूचना के जारी होने के बाद से ही रायपुर स्थित विधानसभा सचिवालय में तैयारियों का दौर बहुत तेजी से शुरू हो गया है।
सचिवालय ने शुरू की सुरक्षा और व्यवस्थाओं की तैयारी
विधानसभा सत्र की तारीखों की घोषणा होते ही राजधानी रायपुर के जीरो पॉइंट स्थित विधानसभा परिसर में सुरक्षा व्यवस्था और अन्य आवश्यक प्रबंधों को लेकर बैठकों का दौर शुरू हो गया है। पुलिस प्रशासन और खुफिया विभागों को सत्र के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही सभी विभागों के मंत्रियों और प्रशासनिक सचिवों को विधानसभा में पूछे जाने वाले संभावित प्रश्नों के उत्तर समय पर तैयार रखने के लिए भी अलर्ट कर दिया गया है। अंततः, तेरह जुलाई से शुरू होने वाला यह मानसून सत्र छत्तीसगढ़ की राजनीति के लिहाज से बेहद सरगर्मियों वाला रहने की उम्मीद है, जिसमें राज्य के विकास से जुड़े कई बड़े फैसले लिए जा सकते हैं।









