CG NEWS : गौरीशंकर गुप्ता/ रायगढ़। रायगढ़ फैमिली कोर्ट के एक ऐसे आदेश ने यहां कानूनी दुनिया में तूफान खड़ा कर दिया, जो हाईकोर्ट के स्पष्ट स्थगन आदेश के बावजूद पारित किया गया। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट, बिलासपुर की एकलपीठ, न्यायमूर्ति बीडी गुरु ने यह आदेश “अवमानना” करार देते हुए रद्द कर दिया और फैमिली कोर्ट के संबंधित प्रोसीडिंग ऑफिसर को ‘कारण बताओ’ (Show‑cause) नोटिस भेजकर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
CG NEWS : स्टे के बाद भी फैसला सुनाया
CG NEWS : मामला रायगढ़ फैमिली कोर्ट में चल रहे एक पारिवारिक विवाद से जुड़ा है, जिसमें याचिकाकर्ता ने अदालत की वर्तमान कार्यवाही को रायगढ़ से अन्य सक्षम न्यायालय में स्थानांतरित करने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में दावा किया गया था कि फैमिली कोर्ट के कर्मचारियों और पक्षकारों की “मिलीभगत” के चलते कार्यवाही प्रभावित हो रही है, जिससे उन्हें न्याय नहीं मिल पा रहा।
CG NEWS : हाईकोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए कार्यवाही पर अंतरिम रोक (स्टे) लगाते हुए स्पष्ट कर दिया था कि रायगढ़ फैमिली कोर्ट निचली अदालत के तौर पर आगे की सुनवाई न करे। इसके बावजूद फैमिली कोर्ट ने निर्धारित स्थगन आदेश को धता बताकर मामले की सुनवाई जारी रखी और आखिरकार याचिकाकर्ता के खिलाफ फैसला सुनाकर भरण‑पोषण या अन्य दायित्व तय करने का आदेश जारी कर दिया।
CG NEWS : हाईकोर्ट ने आदेश निरस्त किया
CG NEWS : जब यह मामला फिर से हाईकोर्ट के समक्ष पहुंचा, तो न्यायमूर्ति बीडी गुरु की एकलपीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उच्च न्यायालय द्वारा स्टे लगने के बाद निचली अदालत के पास आगे की विचार‑विमर्श और फैसला सुनाने का अधिकार समाप्त हो जाता है। इस सिद्धांत का उल्लंघन करते हुए फैमिली कोर्ट के द्वारा दिया गया आदेश न्यायप्रणाली के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है और इसे अस्थिर रूप से जारी किया गया माना गया।
CG NEWS : इसी आधार पर न्यायमूर्ति गुरु ने रायगढ़ फैमिली कोर्ट के उस आदेश को पूर्ण रूप से निरस्त कर दिया, जिसमें पति (याचिकाकर्ता) के खिलाफ भरण‑पोषण या अन्य दायित्व तय किए गए थे। साथ ही, कोर्ट ने यह भी कहा कि स्टे आदेश के बाद भी सुनवाई करना और फैसला सुनाना उच्च न्यायालय की अवमानना के बराबर है, जिस पर गंभीर रूप से जवाब मांगा जाना चाहिए था।
CG NEWS : जज को ‘कारण बताओ’ नोटिस
CG NEWS : हाईकोर्ट ने अपने आदेश में फैमिली कोर्ट के प्रोसीडिंग ऑफिसर को शो‑कॉज नोटिस जारी कर 15 दिन के भीतर लिखित उत्तर दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने पूछा है कि यदि उच्च न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कार्यवाही पर रोक लगा दी थी, तो फिर भी सुनवाई करके फैसला देने का क्या औचित्य था और इस तरह की कार्यवाही के लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जाए।
CG NEWS : इस फैसले से रायगढ़ और आसपास के अन्य जिलों के न्यायाधीशों के लिए एक स्पष्ट संकेत जारी हुआ है कि हाईकोर्ट के स्टे या रोक आदेश को हल्के में नहीं लिया जा सकता। कानूनविदों का कहना है कि यह आदेश निचली अदालतों को उच्च न्यायालय के आदेशों का पूर्ण सम्मान करने की जिम्मेदारी याद दिलाता है और भविष्य में ऐसी अवमानना की घटनाओं को रोकने में मदद करेगा।











