गौरी शंकर गुप्ता/लैलूंगा। “गौमाता हमारी माता है, उनकी सेवा धर्म है” – मंचों से यह भावनात्मक नारा लगाने वाली भाजपा सरकार और उसके स्थानीय संगठन की लैलूंगा में भयानक संवेदनहीनता उजागर हुई है। लैलूंगा नगर के नया बस स्टैंड के पास, दिनचर्या इलेक्ट्रॉनिक और जनरल स्टोर के सामने, दो गौवंश सड़क पर तड़प-तड़पकर दर्दनाक तरीके से मर गईं। इससे भी शर्मनाक बात यह रही कि सुबह से लेकर देर शाम तक प्रशासन से लेकर नगर पंचायत तक कोई भी जिम्मेदार अधिकारी या प्रतिनिधि मौके पर नहीं पहुंचा, जिसके कारण गौमाताओं की लाशें घंटों तक बीच सड़क पर पड़ी रहीं।
प्रशासन की बेरुखी, फोन करने पर भी नहीं हुई कार्रवाई
स्थानीय नागरिकों और दुकानदारों ने इस अमानवीय दृश्य को देखकर तत्काल नगर पंचायत, पशु चिकित्सा विभाग और थाना लैलूंगा को कई बार फोन करके सूचना दी, लेकिन उनकी यह गुहार प्रशासनिक लापरवाही की दीवारों से टकराकर रह गई। पूरे दिन कोई भी अमला मौके पर नहीं पहुंचा और गौमाता की लाशें सड़क पर सड़ती रहीं, जिससे बाजार में तेज दुर्गंध फैल गई और दुकानदारों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी। इस दौरान, “गौसेवा” के स्वयंभू ठेकेदार नेता और गौरक्षक अपने भाषणों और फोटो खिंचाने के कार्यक्रमों में व्यस्त रहे, जबकि सड़कों पर गौवंश दम तोड़ रहा था।
नागरिकों का तीखा सवाल: क्या गौसेवा सिर्फ चुनावी जुमला थी?
लैलूंगा के जागरूक नागरिकों ने इस घटना पर तीखा आक्रोश व्यक्त करते हुए भाजपा और उसके नेताओं से सीधा सवाल किया है। नागरिकों का कहना है कि: “क्या भाजपा की गौसेवा सिर्फ चुनावी जुमला थी? जब जिंदा गौमाता तड़प रही थीं, तब ‘गौरक्षक’ और ‘संघ सेवक’ कहां थे?” यह घटना साफ दर्शाती है कि करोड़ों रुपये के बजट और योजनाओं के बावजूद, भाजपा शासित निकायों का तथाकथित “स्वच्छ भारत” और “गौरक्षा” अभियान केवल पोस्टर और भाषणों तक सीमित है। बीच बाजार में दो गौमाताओं की लाशें घंटों तक पड़ी रहीं, मगर नगर पंचायत के अधिकारी मूकदर्शक बने रहे।
राजनीतिक पाखंड का जीवंत उदाहरण: ‘वोट तो ले लिए, जवाब कौन देगा?’
यह घटना सिर्फ प्रशासनिक अक्षमता नहीं है, बल्कि यह राजनीतिक पाखंड का एक जीवंत उदाहरण है। जनता अब पूछ रही है कि “गौसेवा के नाम पर वोट तो ले लिए, अब जवाब कौन देगा?” और “कहां गए वे नेता जो ‘गौमाता’ की सेवा को धर्म बताते थे?” भाजपा के पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी ने नागरिकों के गुस्से को और बढ़ा दिया है। लैलूंगा की इस सच्चाई ने गौसेवा के नाम पर राजनीति करने वालों को आईना दिखाया है—जिसमें जनता अब साफ देख रही है कि भाजपा की गौसेवा सिर्फ मंचों पर जिंदा है, सड़कों पर नहीं!
जन आंदोलन की चेतावनी, जिम्मेदार अधिकारियों से जवाबतलब की मांग
स्थानीय नागरिकों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगर नगर पंचायत और थाना प्रशासन ने तत्काल मृत गायों के शवों को हटाने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं की, तो वे बड़ा जन आंदोलन शुरू करेंगे। नागरिकों ने कहा है कि आंदोलन के माध्यम से जिम्मेदार अधिकारियों के साथ-साथ भाजपा के जनप्रतिनिधियों से भी उनकी इस संवेदनहीनता और लापरवाही के लिए जवाब मांगा जाएगा। नागरिकों का यह तीखा रुख प्रशासन की नींद तोड़ने और गौसेवा के नाम पर हो रहे इस ढोंग का पर्दाफाश करने के लिए काफी है।











