CG NEWS: आरंग : आरंग नगर पालिका क्षेत्र में इन दिनों अवैध प्लाटिंग और निर्माण को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन नियमों को नजर अंदाज करते हुए प्रभावशाली लोगों और भू-माफियाओं को संरक्षण दे रहा है, जबकि गरीबों पर सख्ती से कार्रवाई की जा रही है।
CG NEWS: कुछ समय पहले तक नियमितीकरण, नामांतरण और अन्य तकनीकी कारणों से निर्माण कार्यों पर रोक थी, लेकिन अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं। आरोप है कि वार्ड नंबर 01, 02, 06, 13, 15, 17 और 16 में बड़े पैमाने पर अवैध प्लाटिंग और जमीन की खरीदी-बिक्री जारी है। यहां तक कि शासकीय जमीनों के सौदे भी खुलेआम हो रहे हैं।
CG NEWS: स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की दोहरी नीति साफ दिख रही है। जहां प्रभावशाली लोगों को अवैध कॉलोनियों में निर्माण और बिक्री की छूट मिल रही है, वहीं छोटे मकान बनाने वाले गरीब परिवारों के काम मामूली खामियों पर रोक दिए जाते हैं। आरोप यह भी है कि कुछ मामलों में भवन निर्माण के लिए एनओसी जारी की जा रही है और टैक्स के नाम पर अवैध वसूली भी हो रही है।
CG NEWS: कई ऐसी कॉलोनियां जिन्हें पहले अवैध घोषित किया गया था, वहां फिर से रजिस्ट्री और निर्माण शुरू होने से लोगों में आक्रोश है। बिना ले-आउट स्वीकृति और मूलभूत सुविधाओं के वादे के साथ जमीनें बेची जा रही हैं, जिससे भविष्य में बुनियादी सुविधाओं की समस्या खड़ी हो सकती है।
CG NEWS: जागरूक नागरिकों का मानना है कि इतनी बड़ी स्तर पर हो रही गतिविधियां बिना प्रशासनिक मिलीभगत के संभव नहीं हैं। उनका कहना है कि इस तरह की अनदेखी से शहर का नियोजन बिगड़ सकता है और आने वाले समय में लोगों को बिजली, पानी और सड़क जैसी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ सकता है।
CG NEWS: इस पूरे मामले में कई सवाल खड़े हो रहे हैं—जिन निर्माण कार्यों पर पहले रोक थी, उन्हें किस आधार पर अनुमति मिली, अवैध कॉलोनियों में खरीदी-बिक्री पर रोक क्यों नहीं लग रही, और कार्रवाई केवल कमजोर वर्ग तक ही सीमित क्यों है।
CG NEWS: रायपुर जिले में प्लाटिंग के लिए सख्त नियम बनाए गए हैं। 2025-26 के नए प्रावधानों के अनुसार कृषि भूमि के छोटे टुकड़ों की रजिस्ट्री पर रोक है, भू-उपयोग परिवर्तन अनिवार्य है, और प्लाटिंग के लिए कॉलोनाइजर लाइसेंस व टाउन एंड कंट्री प्लानिंग से ले-आउट स्वीकृति जरूरी है। साथ ही सड़क, पानी, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं का प्रावधान करना भी अनिवार्य है, तथा 15 प्रतिशत भूखंड आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए आरक्षित रखना होता है।
CG NEWS: फरवरी 2026 के निर्देशों के अनुसार अवैध प्लाटिंग पर 3 से 7 साल तक की सजा, भारी जुर्माना और अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने जैसी कार्रवाई का प्रावधान है। वहीं, मुख्य नगर पालिका अधिकारी शीतल चंद्रवंशी का कहना है कि अवैध प्लाटिंग से जुड़े 19 मामलों में पहले ही प्रकरण दर्ज हैं और वर्तमान में कोई नई शिकायत नहीं मिली है।
CG NEWS: उन्होंने प्रशासन पर लगाए गए संरक्षण के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यदि कहीं ऐसा मामला सामने आता है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में हस्तक्षेप करता है या नहीं, और क्या नियमों का पालन सभी के लिए समान रूप से सुनिश्चित किया जाता है।











