Monday, September 7, 2026
Home Chhattisgarh CG NEWS : घरघोड़ा उपकोषालय या ‘कमीशनखोरी का केंद्र’?…जब रक्षक ही भक्षक...

CG NEWS : घरघोड़ा उपकोषालय या ‘कमीशनखोरी का केंद्र’?…जब रक्षक ही भक्षक बन जाए: मेडिकल क्लेम पास करने के बदले महिला कर्मचारी से डिजिटल वसूली!

CG NEWS
CG NEWS

CG NEWS : गौरी शंकर गुप्ता /​रायगढ़। लोकतंत्र में सरकारी संस्थान ‘जनसेवा’ के मंदिर माने जाते हैं, लेकिन रायगढ़ जिले का घरघोड़ा उपकोषालय इन दिनों भ्रष्टाचार की नई इबारत लिख रहा है। यहाँ फाइलों के पहिए सरकारी नियमों से नहीं, बल्कि ‘20% कमीशन’ के ईंधन से घूमते हैं। हाल ही में एक महिला कर्मचारी से प्रसव (डिलीवरी) संबंधी चिकित्सा देयक पास करने के एवज में की गई ₹5000 की वसूली ने इस व्यवस्था के चेहरे से नकाब उतार दिया है।

CG NEWS : ​भ्रष्टाचार का डिजिटल मॉडल : “पहले PhonePe, फिर फाइल पे” -​सहायक ग्रेड-03 कर्मचारी सिम्मी पटनायक ने अपने मातृत्व और स्वास्थ्य संबंधी वैध क्लेम (₹44,425) के भुगतान की गुहार लगाई थी। लेकिन उपकोषालय अधिकारी मुकेश नायक के लिए यह सेवा का अवसर नहीं, बल्कि उगाही का मौका बन गया।

* ​खुली सौदेबाजी : आरोप है कि पहले बिल का 20% यानी ₹10,000 मांगा गया।
* ​दबाव की राजनीति : फाइल को अटकाकर और मानसिक प्रताड़ना देकर अंततः ₹5000 की अवैध राशि वसूली गई।
* ​तकनीकी बेशर्मी : भ्रष्टाचार अब इतना बेखौफ है कि रिश्वत के लिए WhatsApp का सहारा लिया गया और पैसे PhonePe के जरिए मंगाए गए। डिजिटल इंडिया के दौर में भ्रष्टाचार का यह ‘डिजिटल अवतार’ कानून को सीधी चुनौती है।

CG NEWS : ​क्षेत्रीय सिंडिकेट: लैलूंगा से तमनार तक ‘फिक्स रेट’ का खेल -​विश्वस्त सूत्रों और पीड़ित परिवार के अनुसार, यह कोई इकलौता मामला नहीं है। लैलूंगा, घरघोड़ा और तमनार क्षेत्र में यह चर्चा आम है कि बिना ‘कट-मनी’ दिए किसी भी आहरण-संवितरण अधिकारी (DDO) का बिल यहाँ से पास नहीं होता।

CG NEWS : > ​संवेदनहीनता की पराकाष्ठा : हद तो तब हो जाती है जब मृत शासकीय सेवकों के परिजनों को मिलने वाली राशि को भी महीनों तक लटकाया जाता है, ताकि वे मजबूर होकर घुटने टेक दें और साहब की तिजोरी भर सकें।

CG NEWS : ​साक्ष्यों की गूंज, फिर भी प्रशासन मौन क्यों? -​शिकायतकर्ता राजेश कुमार पटनायक ने साहस दिखाते हुए मुख्यमंत्री और कलेक्टर रायगढ़ के समक्ष कॉल रिकॉर्डिंग, चैट हिस्ट्री और बैंक स्टेटमेंट जैसे ठोस सबूत पेश कर दिए हैं। इसके बावजूद, अब तक किसी ठोस दंडात्मक कार्रवाई का न होना कई गंभीर सवाल खड़े करता है :

* ​क्या आरोपी अधिकारी को किसी रसूखदार का संरक्षण प्राप्त है?
* ​क्या साक्ष्यों के अंबार के बाद भी ‘विभागीय जांच’ केवल समय बिताने का बहाना है?
* ​एक महिला कर्मचारी की प्रसूति सहायता राशि डकारने वाले के विरुद्ध ‘जीरो टॉलरेंस’ कहाँ है?

CG NEWS : कार्रवाई नहीं तो सिस्टम से उठेगा विश्वास :​यह प्रकरण केवल ₹5000 के लेन-देन का नहीं है, बल्कि यह उस नैतिक पतन का प्रतीक है जहाँ एक अधिकारी कर्मचारी के हक के पैसे पर डाका डालता है। जनता अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ‘सेवा समाप्ति’ और ‘कठोर दंडात्मक कार्रवाई’ चाहती है।

CG NEWS : ​अगर आज प्रशासन खामोश रहता है, तो यह माना जाएगा कि भ्रष्टाचार अब सिस्टम का दोष नहीं, बल्कि उसका अनिवार्य हिस्सा बन चुका है। ​रायगढ़ प्रशासन के लिए यह अग्निपरीक्षा है: क्या वे एक ‘भ्रष्ट तंत्र’ को बचाएंगे या ‘न्याय’ की मिसाल पेश करेंगे?

 

 

Share The News

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here