बिलासपुर। CG News : छत्तीसगढ़ में कुपोषण और एनीमिया से लड़ने के लिए सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना अब सवालों के घेरे में आ गई है। जिस फोर्टिफाइड चावल को प्रदेश के ढाई करोड़ गरीबों को सुपोषित बनाने के लिए बांटा जा रहा है, वह कुछ लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। विशेषज्ञ डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यह चावल थैलेसीमिया और सिकल सेल के मरीजों के लिए घातक है, क्योंकि इससे उनके शरीर में आयरन की मात्रा जानलेवा स्तर तक बढ़ सकती है।
CG News : क्या है इस चावल से खतरा?
फोर्टिफाइड चावल में आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन बी-12 मिलाया जाता है। यह उन लोगों के लिए फायदेमंद है जिनमें इन तत्वों की कमी होती है, लेकिन थैलेसीमिया और सिकल सेल जैसी बीमारियों से पीड़ित मरीजों के शरीर में पहले से ही अतिरिक्त आयरन होता है। ऐसे में यह चावल खाने से आयरन ओवरलोड का खतरा बढ़ जाता है, जिससे दिल का दौरा, लिवर सिरोसिस और हार्मोन सिस्टम को गंभीर नुकसान हो सकता है।
अनदेखी और लापरवाही का खेल
इस योजना की सबसे बड़ी लापरवाही यह है कि चावल की बोरियों पर चेतावनी बहुत छोटे अक्षरों में और सिर्फ अंग्रेजी में लिखी गई है। गरीब और अशिक्षित कार्डधारकों को यह चेतावनी कभी समझ नहीं आएगी। इसके अलावा, राशन दुकानदारों को भी इसके फायदे और नुकसान के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है। वे सीधे-सीधे यह चावल लोगों को दे रहे हैं, बिना किसी चेतावनी या सलाह के।
जिम्मेदारी किसकी?
जब सरकार की मंशा कुपोषण को दूर करना है, तो यह सवाल उठता है कि लाखों लोगों के स्वास्थ्य को दांव पर क्यों लगाया जा रहा है? जिस प्रदेश में 27 लाख से अधिक हार्ट और डायबिटीज के मरीज हैं, वहां आयरन की अधिक मात्रा उनके लिए भी खतरा बन सकती है। यह मामला केवल सेहत का नहीं, बल्कि सरकारी व्यवस्था की लापरवाही और जवाबदेही का भी है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को तुरंत इस मामले में दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए और लोगों को इस चावल के सही सेवन के बारे में जागरूक करना चाहिए।













