Burhanpur Swaminarayan Mandir : बुरहानपुर। शहर के सीलमपुरा स्थित प्राचीन स्वामीनारायण मंदिर में भगवान स्वामीनारायण के 155वें पाटोत्सव के अवसर पर करीब 200 वर्ष पुरानी ‘शाकोत्सव’ परंपरा को पूरी श्रद्धा के साथ जीवंत किया गया। मंदिर के महंत स्वामी प्रियपुरुषोत्तमदास जी के मार्गदर्शन में आयोजित इस उत्सव ने श्रद्धालुओं को भक्ति के साथ-साथ इतिहास की दिव्य अनुभूतियों से सराबोर कर दिया।
ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, करीब दो सदी पूर्व भगवान स्वामीनारायण ने स्वयं गुजरात के लोया ग्राम में अपने हाथों से बैंगन का शाक और बाजरे का रोटला बनाकर भक्तों को भोजन कराया था। बुरहानपुर में इसी प्रसंग को दोहराने के लिए विशेष रूप से गुजरात के वड़ताल मंदिर से अनुभवी रसोइयों की टीम बुलाई गई थी। मुख्य रसोइया कैलाश महाराज ने बताया कि पूरी रसोई शास्त्रों और परंपराओं के अनुरूप तैयार की गई, जिसमें लगभग 500 क्विंटल सामग्री का उपयोग किया गया। महाप्रसाद में पारंपरिक बाजरे का रोटला, कढ़ी, बैंगन की सब्जी और हलवा तैयार कर हजारों भक्तों को वितरित किया गया।
इस आध्यात्मिक आयोजन में शामिल हुए क्षेत्रीय सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने भी कतार में बैठकर प्रसाद ग्रहण किया। उन्होंने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि इस महाप्रसाद का स्वाद अलौकिक है और यह उनका सौभाग्य है कि उन्हें भगवान स्वामीनारायण की इस प्राचीन परंपरा का हिस्सा बनने का अवसर मिला।
मंदिर के महंत शास्त्री चिंतनप्रियदास जी ने कार्यक्रम के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शाकोत्सव केवल एक सामूहिक भोज नहीं है, बल्कि यह भगवान की करुणा, सामाजिक समानता और सेवा भाव का संदेश है। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को हमारी गौरवशाली सांस्कृतिक और धार्मिक विरासतों से परिचित कराना है। पूरे दिन मंदिर परिसर भगवान के जयकारों और भक्तिमय वातावरण से गुंजायमान रहा।













