Burhanpur Road Samasya : बुरहानपुर। जिला मुख्यालय से करीब 8 से 10 किलोमीटर दूर मौजूद पातोडा गांव आज भी पक्की सड़क के इंतजार में है। गांव का प्रमुख मार्ग पूरी तरह जर्जर हो चुका है और रोजाना हजारों ग्रामीण इसी कच्चे और खतरनाक रास्ते से गुजरने को मजबूर हैं। कीचड़ से भरे गड्ढे, दलदल और फिसलन भरी मिट्टी यहां के लोगों का रोज का संकट बन चुके हैं।
Burhanpur Road Samasya : गांव तक पहुंचना चुनौती पुलिसकर्मी भी घायल
पातोडा गांव के पास स्थित पुलिस क्वार्टरों में रहने वाले जवानों को हर दिन इसी कच्चे रास्ते से गुजरना पड़ता है। कई पुलिसकर्मी इस खराब सड़क की वजह से हादसे का शिकार हो चुके हैं। ग्रामीणों ने बताया कि इस रास्ते पर गाड़ियां अकसर फंस जाती हैं और कई लोग गिरकर घायल भी हो जाते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दौरान यहां से निकलना सबसे मुश्किल होता है। सड़क पर जमा दलदल आने-जाने वाले हर वाहन को रोक देता है।
ग्रामीणों की पीड़ा प्रशासन तक नहीं पहुंच पाई
गांव के लोगों ने कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को सड़क निर्माण की मांग वाले आवेदन दिए, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। ग्रामीण बताते हैं कि बच्चे स्कूल जाते हैं तो उनके गिरने का डर बना रहता है। रात की ड्यूटी करने वाले कर्मचारी और पुलिसकर्मियों के लिए यह रास्ता और भी अधिक जोखिम भरा हो जाता है।
बरसात में हालात और विकट
बारिश के मौसम में यह कच्चा रास्ता दलदल में बदल जाता है। गड्ढों में भरने वाला पानी और कीचड़ वाहनों को चलने नहीं देता। कई बार ग्रामीणों को अपने वाहन गांव से बाहर छोड़कर पैदल ही जाना पड़ता है।
सवाल अब भी वही कब बनेगी सड़क
पातोडा गांव की सड़क बनने का इंतजार सालों से चल रहा है। ग्रामीणों के लिए सड़क केवल सुविधा नहीं बल्कि जरूरत है। प्रशासन के दफ्तरों में यह मांग कागजों पर दर्ज होकर रह गई है लेकिन गांव की जमीनी हालत अब भी नहीं बदली है। हजारों ग्रामीणों की आंखें अब भी इस इंतजार में हैं कि कब उनके गांव तक विकास की सड़क पहुंचेगी।













