Burhanpur News : गोपाल देवकर/ बुरहानपुर : बुरहानपुर जिले के धुलकोट क्षेत्र के ग्राम पंचायत झिरपांजरिया के हाथियाबारी फालिया में शिक्षा पाने का जो जुनून दिख रहा है, वह हर किसी को झकझोर देता है। यहां स्कूल तक पहुंचने के लिए बच्चों और शिक्षकों को रोज़ाना एक बहते नाले को पार करना पड़ता है। बरसात के दिनों में यही नाला जानलेवा खतरा बन जाता है, फिर भी छोटे-छोटे मासूम भारी बस्ते उठाकर पानी की धार लांघते हैं,कई बार बड़े बच्चे छोटे बच्चों को कंधों पर बैठाकर स्कूल पहुंचाते हैं। शिक्षकों को भी अपने वाहन दूर खड़ा कर कीचड़ भरे रास्तों और नाले से होकर पैदल ही स्कूल जाना पड़ता है,इस स्कूल में कुल 37 बच्चे दर्ज हैं, और सबसे बड़ी बात यह है कि खतरे के बावजूद रोज़ाना शत-प्रतिशत उपस्थिति बनी रहती है। बच्चों का कहना है – “शिक्षा ही हमारा भविष्य है”, और वे किसी भी हाल में पढ़ाई नहीं छोड़ते।
Burhanpur News : ग्रामीण बताते हैं कि कई बार बच्चे नाले में गिरकर चोटिल हो जाते हैं, लेकिन अगले ही दिन वे उसी उत्साह से स्कूल के लिए निकल पड़ते हैं। माता-पिता चिंतित तो हैं, पर बच्चों की पढ़ाई रुकने नहीं देना चाहते,वर्षों से पुलिया और पक्के रास्ते की मांग की जा रही है, फिर भी कोई समाधान नहीं। सवाल उठता है – आज़ादी के 79 साल बाद भी बच्चों को सुरक्षित रास्ता क्यों नहीं मिला?
Burhanpur News : हाथियाबारी फालिया के ये बच्चों का साहस और शिक्षा के प्रति उनका जज़्बा प्रेरणा देता है, वहीं शासन-प्रशासन की लापरवाही पर बड़ा सवाल भी खड़ा करता है। क्या अब इन बच्चों को सुरक्षित भविष्य मिलेगा, या ये खतरों के बीच ही शिक्षा का सपना संजोते रहेंगे? जब इस संबंध में डी पी सी रविंन्द्र महाजन ने कहा कि इस विषयको लेकर सरपंच को पत्र लिखा जाएगा।












