निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के नेपानगर क्षेत्र से सरकारी स्कूलों की चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। मांडवा और बदनापुर गांव के स्कूलों में बच्चे तो समय पर पहुंच रहे हैं, लेकिन शिक्षक समय पर नहीं आ रहे। यह स्थिति शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
मांडवा प्राथमिक शाला में ताले और इंतजार
मांडवा ग्राम पंचायत के प्राथमिक स्कूल में बच्चे बरामदे में बैठकर शिक्षकों का इंतजार करते मिले। कक्षाओं के दरवाजों पर ताले लटके थे और परिसर सूना पड़ा था। किसी भी कक्षा में पढ़ाई संचालित नहीं हो रही थी।
मध्याह्न भोजन कक्ष की हालत भी चिंताजनक मिली। वहां अव्यवस्था और गंदगी नजर आई, जिससे लगा मानो लंबे समय से भोजन व्यवस्था ठीक से संचालित नहीं हुई हो। छात्रों ने बताया कि शिक्षक अभी तक स्कूल नहीं पहुंचे थे।
उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में भी लापरवाही
मांडवा के ही उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में हालात और भी गंभीर पाए गए। स्कूल का मुख्य गेट बंद था और कुछ छात्र दीवार फांदकर अंदर जा रहे थे। कई विद्यार्थी बाहर खड़े इंतजार कर रहे थे।
स्कूल समय बीत जाने के बाद कुछ शिक्षक ऑटो से पहुंचे और ताला खोला गया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि शिक्षकों की रोजाना देरी से पढ़ाई प्रभावित हो रही है। प्रधान पाठक ने सीमित अधिकार होने की बात कही, जबकि ग्रामीणों का दावा है कि कुछ शिक्षक प्रभावशाली होने के कारण उन पर कार्रवाई नहीं होती।
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बदनापुर स्कूल में मध्याह्न भोजन पर सवाल
नेपानगर क्षेत्र के बदनापुर स्कूल में 147 विद्यार्थियों में से केवल 20 बच्चे उपस्थित मिले। मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता भी बेहद खराब बताई गई। बच्चों को सीमित मात्रा में भोजन दिया गया और सफाई व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं थी।
प्रशासन ने दिए जांच के संकेत
मामले पर नेपानगर एसडीएम भागीरथ वाखला ने इसे गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि यह बच्चों के भविष्य से जुड़ा विषय है और जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
बुरहानपुर के इन स्कूलों की स्थिति शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है। अब देखना होगा कि जांच के बाद जिम्मेदारों पर ठोस कार्रवाई होती है या नहीं, क्योंकि शिक्षा व्यवस्था में लापरवाही का सीधा असर बच्चों के भविष्य पर पड़ता है।













