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BIG NEWS : गगन से आया संदेश, 15 जुलाई को लौटेगा भारत का बेटा, रचा नया इतिहास

BIG NEWS : नई दिल्ली। भारत के लिए गर्व का क्षण नजदीक है। भारतीय एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला, जो इस समय अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर हैं, 15 जुलाई को दोपहर 3 बजे धरती पर लौटेंगे। नासा ने इस बात की आधिकारिक पुष्टि कर दी है। शुभांशु एक्सियम-4 मिशन का हिस्सा थे, जिसे 25 जून को अमेरिका के कैनेडी स्पेस सेंटर, फ्लोरिडा से लॉन्च किया गया था।

शुभांशु की वापसी में चार दिन की देरी

इस मिशन की वापसी पहले 10 जुलाई को तय थी, लेकिन तकनीकी और अनुसंधान कारणों से इसे चार दिन बढ़ा दिया गया। अब यह मिशन कुल 18 दिनों का हो गया है। शुभांशु के साथ तीन अन्य अंतरिक्ष यात्री भी इस मिशन में शामिल थे।

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अंतरिक्ष से भारत तक संवाद: पीएम मोदी से वीडियो कॉल
  • अंतरिक्ष स्टेशन से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात करते हुए शुभांशु ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा, “अंतरिक्ष से पृथ्वी अविस्मरणीय दिखती है। यहां से कोई सीमाएं नहीं दिखतीं, बस एकजुट मानवता नजर आती है।
  • प्रधानमंत्री ने हंसते हुए पूछा कि क्या वे अंतरिक्ष में गाजर का हलवा भी लेकर गए थे, जिस पर शुभांशु ने जवाब दिया, “हां सर, हम सबने मिलकर गाजर का हलवा खाया।
Indian Astronaut Shubhanshu Shukla
#SpaceHeroReturns
क्या है एक्सियम-4 मिशन?

एक्सियम-4 एक निजी और सरकारी साझेदारी वाला अंतरिक्ष मिशन है, जिसमें NASA, SpaceX और Axiom Space जैसी प्रमुख संस्थाएं शामिल रहीं। 25 जून को लॉन्च हुए इस मिशन में अंतरिक्ष यान ड्रैगन ने 28 घंटे की यात्रा के बाद 26 जून को ISS पर डॉक किया था।

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अंतरिक्ष में किए गए प्रयोग, गगनयान मिशन की नींव

शुभांशु शुक्ला द्वारा ISS पर किए गए वैज्ञानिक प्रयोगों का डेटा भारत के पहले मानव मिशन गगनयान के लिए बेहद उपयोगी साबित होगा। वहां उन्होंने मानव शरीर पर सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव, जीवन रक्षक प्रणालियों और दीर्घकालीन अंतरिक्ष प्रवास के व्यवहारिक पहलुओं पर परीक्षण किए।

अंतरिक्ष में 16 बार सूर्योदय और सूर्यास्त

शुभांशु ने बताया कि अंतरिक्ष में रहकर उन्होंने एक दिन में 16 बार सूर्योदय और 16 बार सूर्यास्त देखा। यह अनुभव उनके जीवन के सबसे अनोखे और विस्मयकारी पलों में से एक था।

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क्या है इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS)?

ISS एक मानव निर्मित अंतरिक्ष प्रयोगशाला है जो पृथ्वी के चारों ओर 28,000 किमी/घंटा की गति से परिक्रमा करती है। यह हर 90 मिनट में पृथ्वी का एक चक्कर लगाती है। इसे NASA, रूस की Roscosmos, जापान की JAXA, यूरोपीय स्पेस एजेंसी ESA और कनाडा की CSA ने मिलकर बनाया है।

देश की उम्मीद, अंतरिक्ष का सितारा

शुभांशु शुक्ला की यह ऐतिहासिक यात्रा न केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि, बल्कि भारत के अंतरिक्ष विज्ञान की वैश्विक पहचान का प्रतीक बन चुकी है। उनकी वापसी का इंतजार अब सिर्फ परिवार को ही नहीं, बल्कि पूरे देश को है।

14 जुलाई को दोपहर 3 बजे, जब वह धरती पर लौटेंगे—तो सिर्फ एक अंतरिक्ष यात्री नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय गर्व लौटेगा।

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