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भोपाल स्लॉटर हाउस में गौमांस मामले में सर्टिफिकेट देने वाले डॉक्टर पर गिरी गाज, सस्पेंशन के निर्देश

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भोपाल: राजधानी भोपाल में नगर निगम के स्लॉटर हाउस से जुड़े गौमांस स्लॉटिंग मामले में बड़ा प्रशासनिक एक्शन सामने आया है। गौमांस को भैंस का मांस बताकर सर्टिफिकेट जारी करने के आरोपों में घिरे नगर निगम के डॉक्टर बेनी प्रसाद गौर के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मामले को गंभीर मानते हुए भोपाल नगर निगम को डॉक्टर को तत्काल निलंबित करने और पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं।

कैसे सामने आया मामला

जानकारी के अनुसार, भोपाल नगर निगम के स्लॉटर हाउस में जब्त मांस को लेकर विवाद खड़ा हुआ था। जांच के दौरान यह आरोप सामने आए कि गौमांस को जानबूझकर भैंस का मांस (Buffalo Meat) बताकर प्रमाण-पत्र जारी किया गया। यह सर्टिफिकेट नगर निगम में पदस्थ डॉक्टर बेनी प्रसाद गौर द्वारा दिया गया था, जिसके बाद मामला तूल पकड़ गया।

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मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने दिए सख्त निर्देश

नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इस पूरे प्रकरण पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि गौवंश से जुड़ा मामला बेहद संवेदनशील है और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही या साजिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मंत्री ने भोपाल नगर निगम को स्पष्ट निर्देश दिए कि आरोपी डॉक्टर को तत्काल सस्पेंड किया जाए और यह जांच की जाए कि कहीं इसमें और अधिकारी या कर्मचारी भी शामिल तो नहीं हैं।

नगर निगम की भूमिका पर भी सवाल

इस घटना के बाद नगर निगम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। जानकारों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त निगरानी और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जाती, तो यह मामला सामने ही नहीं आता। अब जांच में यह भी देखा जाएगा कि स्लॉटर हाउस में मांस की जांच और सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया में कहीं कोई संगठित गड़बड़ी तो नहीं हुई।

धार्मिक और सामाजिक संगठनों में आक्रोश

गौमांस के कथित सर्टिफिकेशन को लेकर शहर के धार्मिक और सामाजिक संगठनों में नाराजगी देखने को मिल रही है। संगठनों ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है और कहा है कि ऐसे मामलों से सामाजिक सौहार्द प्रभावित होता है।

जांच के बाद और कार्रवाई संभव

नगर निगम सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक कार्रवाई के बाद अब पूरे प्रकरण की विभागीय और कानूनी जांच की जाएगी। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो डॉक्टर के खिलाफ सेवा नियमों के तहत कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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