भोपाल : भोपाल में भोपाल डिक्लेरेशन-2 का फाइनल ड्राफ्ट आज औपचारिक रूप से जारी कर दिया गया। दो दिवसीय ड्राफ्टिंग बैठक के बाद यह दस्तावेज सामने आया है, जिसमें अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) से जुड़े मुद्दों पर व्यापक और गहन मंथन किया गया। इस बैठक को सामाजिक न्याय और समावेशी राजनीति की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
राजनीतिक और सामाजिक नेतृत्व की मजबूत मौजूदगी
ड्राफ्टिंग बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा, आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया, कांग्रेस विधायक फूलसिंह बरैया और कांग्रेस CEC सदस्य ओंकार सिंह मरकाम सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। बैठक में SC-ST समाज से जुड़े जमीनी मुद्दों, अधिकारों और नीतिगत खामियों पर खुलकर चर्चा हुई।
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60 से अधिक विशेषज्ञों ने की 2002 डिक्लेरेशन की समीक्षा
भोपाल डिक्लेरेशन-2 की ड्राफ्टिंग प्रक्रिया में 60 से अधिक विषय विशेषज्ञों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और नीति विश्लेषकों ने भाग लिया। इस दौरान साल 2002 में लागू किए गए भोपाल डिक्लेरेशन के 21 बिंदुओं की गहन समीक्षा की गई। जिन प्रावधानों को पिछले दो दशकों में प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया जा सका, उनके पीछे के कारणों की पहचान करने पर विशेष जोर दिया गया।
एक साल तक चलेगा चरणबद्ध मंथन
भोपाल डिक्लेरेशन-2 को अंतिम रूप देने से पहले पूरे देश में एक साल तक चरणबद्ध मंथन किया जाएगा। इसके तहत जिला और राज्य स्तर पर सुझाव लिए जाएंगे, ताकि दस्तावेज को जमीनी हकीकत से जोड़ा जा सके। सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों और आम नागरिकों को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा।
2002 के बाद अब ‘वर्जन-2’ की तैयारी
गौरतलब है कि साल 2002 में दिग्विजय सिंह सरकार के दौरान भोपाल डिक्लेरेशन लागू किया गया था। अब, बदलते सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य और SC-ST समाज की नई चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए भोपाल डिक्लेरेशन-2 लाने की तैयारी की जा रही है, जिसे सामाजिक न्याय के लिए एक नए रोडमैप के रूप में देखा जा रहा है।









