Betul Bribery Case:शशांक सोनकपुरिया\ मध्य प्रदेश के बैतूल में वन विभाग से जुड़ा रिश्वतखोरी का बड़ा मामला सामने आया है। भोपाल लोकायुक्त की टीम ने पश्चिम वन मंडल कार्यालय में कार्रवाई करते हुए एक बाबू को कथित तौर पर 55 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़ा है। कार्रवाई के दौरान एक कंप्यूटर ऑपरेटर को भी पकड़े जाने की जानकारी सामने आई है।
पुराने प्रकरण के नाम पर वन रक्षक से मांगे जा रहे थे पैसे
जानकारी के मुताबिक, पश्चिम वन मंडल की सांवलीगढ़ रेंज में पदस्थ एक वन रक्षक के पुराने पीओआर प्रकरण को लेकर मामला सामने आया था। बताया जा रहा है कि यह प्रकरण लगभग खत्म हो चुका था, लेकिन प्रमोशन से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराने और पुराने मामले को निपटाने के नाम पर डिवीजन कार्यालय में पदस्थ बाबू और कंप्यूटर ऑपरेटर द्वारा वन रक्षक से कथित तौर पर 55 हजार रुपए की मांग की जा रही थी।आरोप है कि दोनों कर्मचारी वन रक्षक पर दबाव बना रहे थे और रिश्वत नहीं देने पर उसका प्रमोशन रोकने की धमकी भी दी जा रही थी।
DFO और SDO के नाम पर भी मांगी गई रिश्वत
वन रक्षक के मुताबिक, उससे रिश्वत की रकम डीएफओ और एसडीओ के नाम पर मांगी जा रही थी। लगातार दबाव और कथित धमकियों से परेशान होकर वन रक्षक ने पहले विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत की।बताया गया कि वन रक्षक ने डीएफओ और सीसीएफ के सामने शिकायत रखी थी, लेकिन करीब एक महीने बाद भी कथित तौर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद परेशान वन रक्षक ने भोपाल लोकायुक्त में शिकायत कर दी।
तीन गाड़ियों में बैतूल पहुंची लोकायुक्त की टीम
Betul Bribery Case: शिकायत मिलने के बाद भोपाल से लोकायुक्त की टीम बैतूल पहुंची। बताया जा रहा है कि टीम तीन वाहनों से पश्चिम वन मंडल कार्यालय पहुंची और शिकायत के आधार पर कार्रवाई की।लोकायुक्त टीम ने कथित तौर पर बाबू को 55 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़ लिया। कार्रवाई के दौरान कंप्यूटर ऑपरेटर को भी हिरासत में लिए जाने की जानकारी है।
कार्रवाई के बाद वन विभाग में मचा हड़कंप
Betul Bribery Case: लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद वन विभाग के कार्यालय में हड़कंप मच गया। मामले में आगे की जांच और कानूनी कार्रवाई जारी है। हालांकि, रिश्वत की रकम किस अधिकारी के कहने पर मांगी जा रही थी और इसमें किसी वरिष्ठ अधिकारी की प्रत्यक्ष भूमिका थी या नहीं, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।वन रक्षक ने आरोप लगाया कि विभाग में निचले स्तर के कर्मचारियों की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जाता और उन्हें कई बार दबाव व धमकियों का सामना करना पड़ता है। उसका कहना है कि इसी वजह से बाबुओं के हौसले बढ़ते हैं।
लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जांच में रिश्वत मांगने के पीछे किसी अन्य अधिकारी की भूमिका भी सामने आती है या मामला केवल संबंधित कर्मचारियों तक सीमित रहता है।





