अयोध्या: भगवान राम की नगरी अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र इन दिनों मंत्रों और जयश्रीराम के जयकारों से गुंजायमान है। लंबे इंतजार और धार्मिक अनुष्ठानों के बाद अब वह शुभ समय आ गया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वजा फहराई। इस अवसर पर RSS प्रमुख मोहन भागवत, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल भी उपस्थित रहे।
रामलला के दर्शन और पूजा-अर्चना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबसे पहले रामलला के गर्भगृह में पूजा-अर्चना की और भगवान राम के दर्शन किए। इसके बाद मंदिर के शिखर पर भगवा ध्वजा फहराई गई। पूरे अयोध्या शहर को इस अवसर के लिए 1000 क्विंटल फूलों से सजाया गया। पीएम मोदी और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में यह धार्मिक अनुष्ठान सम्पन्न हुआ, जिसने श्रद्धालुओं में उत्साह और भक्ति का माहौल पैदा कर दिया।
सप्तमंदिर और वैदिक अनुष्ठान
ध्वजारोहण से पहले प्रधानमंत्री मोदी सप्तमंदिर पहुंचे, जहाँ महर्षि वशिष्ठ, महर्षि विश्वामित्र, महर्षि अगस्त्य, महर्षि वाल्मीकि, देवी अहिल्या, निषादराज गुहा और माता शबरी से जुड़े मंदिर शामिल हैं। 20 नवंबर से ही यहाँ वैदिक अनुष्ठान चल रहे हैं, जिसमें देश भर से आए 108 आचार्य भाग ले रहे हैं। अयोध्या से लेकर नेपाल के जनकपुर धाम तक सियाराम विवाह का उत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है।
भगवा ध्वजा का महत्व और विशेषता
राम मंदिर के शिखर पर फहराया गया भगवा ध्वज 10 फीट ऊंचा और 20 फीट लंबा है। इस ध्वज में भगवान राम की वीरता का प्रतीक सूर्य, ॐ का निशान और कोविदार वृक्ष अंकित है। यह ध्वज पारंपरिक उत्तर भारतीय नागर शैली में लहराएगा। हिंदू मान्यता के अनुसार, राम सूर्यवंशी थे और यह ध्वज सूर्य देवता के साथ रामवंशीय प्रतीकों का प्रतीक है।
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धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व
रामायण के अनुसार, रामलला के जन्म के समय सूर्य का रथ रुक गया था और एक महीने तक रात नहीं हुई थी। भगवान राम ने रावण पर विजय प्राप्त करने से पहले महर्षि अगस्त्य की सलाह पर सूर्य देव की पूजा की थी।
यह धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व का कार्यक्रम अयोध्या और भारतभर के हिंदू समाज के लिए गर्व और भक्ति का प्रतीक है।इस प्रकार, अयोध्या में भगवा धर्म ध्वजा फहराने का कार्यक्रम न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह सांस्कृतिक विरासत और श्रद्धा की अलख जगाने वाला भी है।











