Sunday, October 4, 2026
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Aparajita Sarangi : PM -CM रहे 30 दिन जेल में तो जाएगी कुर्सी! संसद में JPC गठित, अपराजिता सारंगी बनीं अध्यक्ष

Aparajita Sarangi
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Aparajita Sarangi : नई दिल्ली। प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों को गंभीर आरोपों में गिरफ्तारी या हिरासत में जाने की स्थिति में पद से हटाने से जुड़े विधेयकों की जांच के लिए संसद की संयुक्त समिति का गठन किया गया है। भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी को इस समिति की अध्यक्ष बनाया गया है।

Aparajita Sarangi : बुधवार, 13 नवंबर 2025 को गठित इस समिति का उद्देश्य उन प्रस्तावित कानूनों की समीक्षा करना है, जिनके तहत प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या केंद्रीय और राज्य मंत्रियों को 30 दिनों तक जेल में रहने या हिरासत में होने की स्थिति में अपने पद से हटना होगा। सरकार का कहना है कि यह विधेयक शासन में जवाबदेही सुनिश्चित करेगा, जबकि विपक्ष का आरोप है कि यह लोकतांत्रिक सिद्धांतों के खिलाफ है।

Aparajita Sarangi : विपक्षी दलों ने समिति का बहिष्कार किया है। कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस सहित कई प्रमुख दलों ने इस समिति में हिस्सा न लेने का निर्णय लिया। हालांकि, राकांपा (शरद पवार गुट) ने अन्य विपक्षी दलों से अलग रुख अपनाते हुए इसमें भागीदारी की है।

Aparajita Sarangi : लोकसभा सचिवालय के अनुसार, समिति में कुल 31 सदस्य हैं। इनमें 15 सदस्य भाजपा के, 11 एनडीए सहयोगी दलों के और एक नामित सदस्य हैं। पैनल में भाजपा के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद और अनुराग ठाकुर भी शामिल हैं, जबकि राज्यसभा से ब्रज लाल और उज्ज्वल निकम को नामित किया गया है।

Aparajita Sarangi : विपक्ष से सिर्फ चार सदस्य इस समिति में हैं—राकांपा (एसपी) की सुप्रिया सुले, अकाली दल की हरसिमरत कौर बादल, एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी और वाईएसआरसीपी के निरंजन रेड्डी। राज्यसभा की नामित सदस्य सुधा मूर्ति को भी समिति में शामिल किया गया है।

Aparajita Sarangi : यह प्रस्तावित कानून संसद के मानसून सत्र के अंतिम दिन, 20 अगस्त को पेश किए गए तीन विधेयकों पर आधारित है—जिन्हें लोकसभा ने संयुक्त समिति को भेजने का प्रस्ताव पारित किया था। माना जा रहा है कि सरकार इस बिल के जरिए उस स्थिति से बचना चाहती है जैसी दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद बनी थी, जब उन्होंने पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था।

Aparajita Sarangi : राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस संयुक्त समिति का गठन संसद में सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ती टकराव की नई कड़ी है, जिसे सत्ता पक्ष जवाबदेही के रूप में पेश कर रहा है, जबकि विपक्ष इसे लोकतंत्र पर हमला बता रहा है।

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