Amit Shah Statement : नई दिल्ली, 25 अगस्त 2025 — पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच गृह मंत्री अमित शाह ने पहली बार इस मुद्दे पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी है। शाह ने स्पष्ट किया कि धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों के चलते पद से इस्तीफा दिया और उनके नजरबंद होने के विपक्ष के दावे झूठे और भ्रामक हैं।
Amit Shah Statement : अमित शाह ने एक इंटरव्यू में कहा
“धनखड़ जी संवैधानिक पद पर थे और उन्होंने अपने कार्यकाल में संविधान के अनुसार कार्य किया। उन्होंने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दिया है। इसे किसी और दिशा में देखने की जरूरत नहीं है।”
शाह ने यह भी कहा कि विपक्ष को इस मुद्दे को अनावश्यक रूप से तूल नहीं देना चाहिए, और सच-झूठ की व्याख्या केवल विपक्षी बयानों पर आधारित नहीं हो सकती।
विपक्ष के आरोप: नजरबंदी और राजनीतिक दबाव
पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई को संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके तुरंत बाद विपक्ष ने आरोप लगाए कि उनका इस्तीफा राजनीतिक दबाव में लिया गया है और उन्हें नजरबंद कर दिया गया है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी, शिवसेना सांसद संजय राउत और वकील व पूर्व सांसद कपिल सिब्बल जैसे विपक्षी नेताओं ने उनके गायब रहने और इस्तीफे के कारणों पर सवाल उठाए हैं।
राहुल गांधी का बयान: “मध्यकालीन व्यवस्था की वापसी”
20 अगस्त को एक कांग्रेस कार्यक्रम में राहुल गांधी ने कहा,
“हम मध्यकालीन दौर में लौट रहे हैं, जहां राजा किसी को भी हटा सकता था। अगर आपका चेहरा पसंद नहीं आया, तो ईडी से मामला दर्ज करवा दिया जाता है और 30 दिन में हटा दिया जाता है।”
उन्होंने कहा कि धनखड़ के इस्तीफे और उसके बाद की स्थिति पर जनता को सवाल पूछने का अधिकार है। राहुल ने यह भी कहा कि उन्हें खुद नहीं पता कि “पुराने उपराष्ट्रपति कहां हैं।”
सरकार की सफाई: संवैधानिक दायरे में काम किया गया
सरकार की ओर से यह कहा गया है कि धनखड़ ने निजी स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दिया, और यह पूरी प्रक्रिया संवैधानिक नियमों के तहत हुई। गृह मंत्री अमित शाह ने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर अनावश्यक बहस करना लोकतांत्रिक संस्थानों की गरिमा के खिलाफ है।











