Ambedkar Statue Controversy : बुरहानपुर (लालबाग)। जिले के उपनगर लालबाग स्थित सागर टावर के पास डॉ. बाबा साहब अंबेडकर की प्रतिमा स्थापित करने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। प्रशासन द्वारा प्रतिमा के लिए बनाए गए स्ट्रक्चर को तोड़े जाने से नाराज अनुयायियों ने मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को प्रदर्शनकारियों को समझाने पहुँचे नगर निगम अधिकारियों और नायब तहसीलदार को भारी विरोध का सामना करना पड़ा और उन्हें खाली हाथ (बैरंग) वापस लौटना पड़ा।
2019 से मिली थी अनुमति, फिर क्यों टूटा स्ट्रक्चर?
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रतिमा स्थापना के लिए नगर निगम और जिला प्रशासन सहित सभी संबंधित विभागों से वर्ष 2019 में ही अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त हो चुका था। हाल ही में निगम परिषद ने प्रस्ताव पास कर निर्माण कार्य शुरू कराया था और स्ट्रक्चर भी तैयार हो गया था।
विवाद का कारण: प्रशासन का कहना है कि एक स्थानीय युवक ने यातायात बाधित होने की शिकायत दर्ज कराई थी। इसी शिकायत के आधार पर प्रशासन ने रातों-रात स्ट्रक्चर को ढहा दिया और अब प्रतिमा को किसी अन्य स्थान पर शिफ्ट करने का दबाव बना रहे हैं।
“जातिवादी मानसिकता” का लगाया आरोप
धरने पर बैठे अनुयायियों और पार्षद पति मनोज सुरवाड़े ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे “जातिवादी मानसिकता” करार दिया है। उनका तर्क है कि प्रतिमा चौराहे के बीच स्थापित होनी है, जिससे दोनों ओर का यातायात सुचारू रहेगा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सभी अनुमतियाँ पहले से मौजूद हैं, तो अचानक यातायात का बहाना बनाकर निर्माण क्यों रोका गया?
प्रशासन की मिन्नतें नाकाम, आंदोलन होगा उग्र
मौके पर पहुँचे नायब तहसीलदार जितेंद्र अलावे और नगर निगम की टीम ने आंदोलनकारियों को अन्य स्थान पर प्रतिमा लगाने के लिए मनाने की कोशिश की, लेकिन समर्थकों ने दोटूक कह दिया कि “प्रतिमा उसी स्थान पर लगेगी, जहाँ के लिए अनुमति मिली है।”
भूख हड़ताल की दी चेतावनी
बाबा साहब के अनुयायियों ने प्रशासन को अल्टीमेटम दिया है कि यदि शनिवार तक उनकी मांगें नहीं मानी गईं और उसी स्थान पर निर्माण शुरू नहीं हुआ, तो यह धरना भूख हड़ताल में बदल जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में होने वाले किसी भी उग्र आंदोलन और कानून-व्यवस्था की स्थिति के लिए जिला प्रशासन स्वयं जिम्मेदार होगा।











