Bageshwar Dham Cancer Hospital : बागेश्वर धाम में ‘दवा और दुआ’ का महासंगम: एस्सार ग्रुप ने संभाली कैंसर अस्पताल निर्माण की कमान, 18 माह में होगा तैयार

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Bageshwar Dham Cancer Hospital : छतरपुर। बागेश्वर धाम पीठाधीश पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के संकल्प और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रखी गई आधारशिला के बाद, अब ‘बागेश्वर बालाजी कैंसर अस्पताल एवं रिसर्च सेंटर’ का निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर शुरू हो गया है। देश के प्रतिष्ठित एस्सार ग्रुप (Essar Group) के डायरेक्टर प्रशांत रुइया ने इस पुनीत कार्य की जिम्मेदारी संभाली है। शुक्रवार को उन्होंने अपनी टीम के साथ धाम पहुँचकर बालाजी के दर्शन किए और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच निर्माण कार्य का विधिवत शुभारंभ किया।

3 किलोमीटर की बाउंड्रीवाल तैयार, अब खड़ा होगा मुख्य ढांचा

अस्पताल के निर्माण के लिए प्राथमिक चरण का कार्य पूर्ण हो चुका है। लगभग 3 किलोमीटर लंबी चहारदिवारी (बाउंड्रीवाल) बनाकर अस्पताल के लिए निर्धारित क्षेत्र को सुरक्षित कर लिया गया है। भूमि पूजन के अवसर पर प्रशांत रुइया ने पांच कन्याओं का पूजन किया। इस दौरान उनके साथ केजेएस सीमेंट के डायरेक्टर पवन अहलूवालिया, श्रृंगारी महाराज और बागेश्वर धाम जन सेवा समिति के पदाधिकारी मौजूद रहे।

25 एकड़ में फैलेगा ‘संजीवन’ परिसर: गौशाला से सोलर पार्क तक

यह अस्पताल केवल एक चिकित्सा केंद्र नहीं, बल्कि एक आधुनिक और आध्यात्मिक परिसर होगा। 25 एकड़ के इस कैंपस में निम्नलिखित सुविधाएं होंगी:

  • पर्यावरण और ऊर्जा: अस्पताल को रोशन करने के लिए अपना सोलर पार्क होगा। साथ ही बायो पार्क और बोटैनिकल गार्डन विकसित किए जाएंगे।

  • गौ सेवा और अध्यात्म: परिसर में एक भव्य गौशाला का निर्माण होगा, जहाँ वेद लक्षणा गौ माता की सेवा की जाएगी।

  • परिजनों के लिए सुविधा: मरीजों के साथ आने वाले परिजनों के ठहरने के लिए सर्वसुविधायुक्त धर्मशाला और स्टाफ क्वार्टर बनाए जाएंगे।

बुंदेलखंड के लिए वरदान: 1.5 साल का लक्ष्य

बागेश्वर धाम जन सेवा समिति के सचिव राजेंद्र मिश्रा ने बताया कि कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से जूझ रहे गरीब और जरूरतमंदों को राहत देने के लिए महाराज श्री ने यह संकल्प लिया है। एस्सार ग्रुप ने भरोसा दिलाया है कि अस्पताल का मुख्य ढांचा अगले 18 से 20 माह (डेढ़ साल) में बनकर तैयार हो जाएगा। यह अस्पताल बुंदेलखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश के उन मरीजों के लिए उम्मीद की नई किरण बनेगा जो महंगे इलाज के अभाव में दम तोड़ देते हैं।

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