Allahabad HC का ऐतिहासिक फैसला : आर्थिक रूप से कमजोर कैदियों को राहत

VIKASH KHALKHO

Allahabad High Court : प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा है कि अब कैदियों की रिहाई के लिए दो नहीं, बल्कि एक जमानतदार पर्याप्त होगा। कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया कि कई कैदी महज़ इसलिए वर्षों तक जेल में बंद रहते हैं क्योंकि वे दो जमानतदारों की व्यवस्था नहीं कर पाते।

यह आदेश न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने गोरखपुर की बच्ची देवी की अर्जी पर सुनवाई करते हुए दिया। कोर्ट ने कहा कि आर्थिक और सामाजिक स्थिति की वजह से जमानत की शर्तें पूरी न कर पाने वाले कैदियों के मामले बार-बार सामने आए हैं, जिन्हें अब इस फैसले से राहत मिलेगी।

कोर्ट के निर्देश

  • अब मजिस्ट्रेट या संबंधित न्यायालय आरोपी की आर्थिक और सामाजिक स्थिति का आकलन करके केवल एक जमानतदार पर जमानत स्वीकृत कर सकेंगे।
  • जमानत बॉन्ड की राशि आरोपी की वित्तीय क्षमता को देखते हुए तय की जाएगी।
  • सभी जिला जजों को इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

कानूनी जानकारों का मानना है कि यह फैसला गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर कैदियों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, क्योंकि अब वे लंबी कैद झेलने के बजाय आसानी से रिहाई पा सकेंगे।

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विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।
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