Abhanpur Sawmill: अभनपुर। अभनपुर स्थित मामनचंद हुकुमचंद आरा मिल में छापेमारी के दौरान बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित सरई लकड़ी और अन्य लकड़ियां मिलने के बावजूद 15 दिन से अधिक समय बीत जाने पर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से वन विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। मामले में सबसे अधिक सवाल स्थानीय डिप्टी रेंजर की भूमिका को लेकर उठ रहे हैं, क्योंकि नियमानुसार आरा मिलों का नियमित निरीक्षण, मासिक सत्यापन और रिपोर्ट तैयार कर विभाग को भेजने की जिम्मेदारी उन्हीं पर होती है।
मुख्य वन संरक्षक के निर्देश पर जारी है जांच
जानकारी के अनुसार, मुख्य वन संरक्षक (CCF) के निर्देश पर गठित विशेष जांच टीम पिछले कई दिनों से आरा मिल में मौजूद लकड़ियों का भौतिक सत्यापन कर रही है। जांच के दौरान 3 अगस्त को अन्य लकड़ियों के नीचे छिपाकर रखे गए सरई के कई गोले बरामद किए गए, जिसके बाद जांच और गहन कर दी गई।
जांच टीम अब सरकारी और निजी खरीदी के रिकॉर्ड, ट्रांजिट पास (TP), बिक्री रजिस्टर और वर्तमान स्टॉक का मिलान कर यह पता लगाने में जुटी है कि प्रतिबंधित लकड़ी मिल तक कैसे पहुंची और रिकॉर्ड में इसका उल्लेख क्यों नहीं है।
डिप्टी रेंजर की निगरानी पर उठ रहे सवाल
Abhanpur Sawmill: पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि मिल परिसर में लंबे समय से प्रतिबंधित लकड़ी मौजूद थी, तो नियमित निरीक्षण के दौरान इसकी जानकारी विभाग को क्यों नहीं दी गई? नियमानुसार प्रत्येक आरा मिल की समय-समय पर जांच कर उसकी रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों को भेजना स्थानीय डिप्टी रेंजर की जिम्मेदारी होती है।ऐसे में अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या निरीक्षण में लापरवाही बरती गई या फिर किसी स्तर पर जानकारी छिपाई गई।
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने की निष्पक्ष जांच की मांग
Abhanpur Sawmill: क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ताओं और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों का आरोप है कि स्थानीय वन अमले, विशेषकर डिप्टी रेंजर और फील्ड स्टाफ की जानकारी के बिना इतनी बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित सरई लकड़ी का मिल तक पहुंचना और लंबे समय तक वहां सुरक्षित रहना संभव नहीं है।उन्होंने पूरे मामले की जांच किसी स्वतंत्र अधिकारी या दूसरे वन मंडल की टीम से कराने की मांग की है, ताकि जांच पूरी तरह निष्पक्ष हो सके।
विधायक की नाराजगी के बाद दोबारा पहुंची जांच टीम
सूत्रों के मुताबिक, मामले में विधायक इंद्रकुमार साहू द्वारा नाराजगी जताए जाने के बाद मुख्य वन संरक्षक ने दोबारा जांच टीम भेजी। इसके बावजूद अब तक न तो किसी अधिकारी पर कार्रवाई हुई है और न ही मिल संचालक के खिलाफ कोई ठोस कदम उठाया गया है।कार्रवाई में हो रही देरी से पूरे मामले में मिलीभगत की आशंकाएं और गहरी होती जा रही हैं।
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जांच रिपोर्ट पर टिकी सभी की नजर
Abhanpur Sawmill: फिलहाल वन विभाग की जांच जारी है और सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं। यदि जांच में किसी अधिकारी की लापरवाही, कर्तव्य में चूक या संलिप्तता सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों और मिल संचालकों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
हालांकि, जांच पूरी होने और आधिकारिक रिपोर्ट आने से पहले किसी भी अधिकारी या व्यक्ति की जिम्मेदारी तय होना बाकी है। इसलिए पूरे मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।




