प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन पर खास तोहफा : उनके उपहारों की ऑनलाइन नीलामी शुरू, जानें कैसे बनें हिस्सा

Parivesh
प्रधानमंत्री मोदी

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 75वें जन्मदिन के खास मौके पर, उन्हें मिले यादगार उपहारों की ऑनलाइन नीलामी आज से शुरू हो गई है। यह नीलामी 2 अक्टूबर तक चलेगी, जिसमें आप भी शामिल होकर न केवल एक अनोखा तोहफा जीत सकते हैं, बल्कि ‘नमामि गंगे मिशन’ में भी अपना योगदान दे सकते हैं।

क्या है खास इस नीलामी में?

केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित इस नीलामी में प्रधानमंत्री को मिले 1,300 से ज़्यादा अनोखे उपहार शामिल हैं। इनमें से कुछ खास हैं:

  • पैरालंपिक 2024 के खिलाड़ियों के जूते: पैरालंपिक में मेडल जीतने वाले खिलाड़ियों द्वारा दिए गए जूते भी इस नीलामी का हिस्सा हैं। इनका आधार मूल्य 7.70 लाख रुपये है।
  • तुलजा भवानी की मूर्ति: इस नीलामी की सबसे महंगी वस्तु तुलजा भवानी की मूर्ति है, जिसका आधार मूल्य 1.03 करोड़ रुपये रखा गया है।
  • अन्य उपहार: इनके अलावा, पेंटिंग्स, कलाकृतियां, मूर्तियां, देवी-देवताओं की प्रतिमाएं, तलवारें और मंदिरों की प्रतिकृतियां भी नीलामी में हैं।

क्यों खास है यह पहल?

इस नीलामी से मिलने वाली पूरी राशि मां गंगा के संरक्षण और नमामि गंगे मिशन के लिए दी जाएगी। पिछले 6 सालों में ऐसी ही नीलामी से 50.33 करोड़ रुपये से ज़्यादा की राशि गंगा की सफाई में लगाई जा चुकी है। यह पहल लोगों को न सिर्फ ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व की वस्तुएं खरीदने का मौका देती है, बल्कि देश के एक बड़े राष्ट्रीय मिशन में भागीदार बनने का अवसर भी देती है।

कैसे लें नीलामी में हिस्सा?

अगर आप भी इस नीलामी में भाग लेना चाहते हैं, तो बस इन आसान स्टेप्स को फॉलो करें:

  1. वेबसाइट पर जाएं: http://pmmementos.gov.in पर जाकर खुद को रजिस्टर करें।
  2. लॉगिन करें: रजिस्ट्रेशन के बाद अपने मोबाइल नंबर या ईमेल आईडी से लॉगिन करें।
  3. कैटलॉग देखें: वेबसाइट पर उपलब्ध सभी उपहारों की लिस्ट देखें और अपनी पसंद का आइटम चुनें।
  4. बोली लगाएं: आइटम पर क्लिक करके उसकी तय कीमत से ज़्यादा की बोली लगाएं।
  5. भुगतान करें: अगर आपकी बोली सबसे ऊंची रही, तो आपको ऑनलाइन भुगतान करना होगा। इसके बाद, आइटम आपके पते पर भेज दिया जाएगा।

यह नीलामी न केवल प्रधानमंत्री के जन्मदिन का जश्न मनाने का एक अनूठा तरीका है, बल्कि देश की सबसे पवित्र नदी को बचाने के लिए एक बड़ा कदम भी है।

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