Tehsildar Vehicle Controversy : अकोदिया | 27 मार्च 2026 शहर के सबसे व्यस्ततम टप्पा चौराहे पर इन दिनों यातायात व्यवस्था सुधरने के बजाय और अधिक बिगड़ती नजर आ रही है। विडंबना यह है कि इस अव्यवस्था का मुख्य कारण कोई आम नागरिक नहीं, बल्कि खुद नियमों का पालन करवाने वाले जिम्मेदार अधिकारी हैं। स्थानीय नागरिकों और राहगीरों ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि तहसीलदार की शासकीय गाड़ी अक्सर टप्पा चौराहे के बिल्कुल बीचों-बीच खड़ी कर दी जाती है, जिससे आवागमन पूरी तरह बाधित हो रहा है।
यह चौराहा अकोदिया का हृदय स्थल माना जाता है, जहाँ से दिनभर सैकड़ों वाहनों का आना-जाना लगा रहता है। बीच सड़क पर शासकीय वाहन खड़ा होने से मार्ग संकरा हो जाता है और देखते ही देखते वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। इस जाम के कारण न केवल आम जनता परेशान हो रही है, बल्कि आपातकालीन सेवाओं जैसे एम्बुलेंस को भी निकलने में भारी मशक्कत करनी पड़ती है। व्यस्त समय में बेतरतीब खड़ी यह गाड़ी दुर्घटनाओं को भी खुला आमंत्रण दे रही है।
मामले में प्रशासन का दोहरा मापदंड भी साफ नजर आता है। जहाँ एक ओर तहसीलदार की भारी-भरकम गाड़ी सड़क पर खड़ी होकर जाम का सबब बन रही है, वहीं दूसरी ओर कार्यालय के कर्मचारियों की बाइक टप्पा कार्यालय के सुरक्षित परिसर के अंदर व्यवस्थित तरीके से खड़ी की जाती है। कार्यालय के अंदर पर्याप्त जगह होने के बावजूद मुख्य सड़क को ‘वीआईपी पार्किंग’ के रूप में उपयोग करना अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। एक परेशान राहगीर ने तंज कसते हुए कहा, “जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं और नियम बनाने वाले ही उन्हें पैरों तले रौंदें, तो आम जनता से अनुशासन की उम्मीद बेमानी है।”
स्थानीय निवासियों और व्यापारियों में इस वीआईपी संस्कृति को लेकर भारी आक्रोश व्याप्त है। लोगों ने जिला प्रशासन और वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि इस अव्यवस्था पर तुरंत संज्ञान लिया जाए। मांग की जा रही है कि सुनिश्चित किया जाए कि सभी शासकीय वाहन निर्धारित पार्किंग क्षेत्र में ही खड़े हों, ताकि टप्पा चौराहे को जाम मुक्त बनाया जा सके और जनता को इस रोज-रोज की परेशानी से निजात मिल सके।











