MP Education Department Scam : भोपाल। मध्यप्रदेश के शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार का एक बड़ा और सनसनीखेज मामला सामने आया है। कांग्रेस मीडिया प्रभारी मुकेश नायक ने जल संसाधन विभाग की तर्ज पर शिक्षा विभाग में भी एक ‘सिंडिकेट’ (गिरोह) बनाकर सरकारी खजाने को लूटने के गंभीर आरोप लगाए हैं। भोपाल स्थित ‘बिंद कोटी’ इस पूरे घोटाले का मुख्य केंद्र बताया जा रहा है, जहाँ बाहरी लोग बैठकर प्रदेश के महत्वपूर्ण टेंडरों और फिक्सेशन की स्क्रिप्ट लिख रहे हैं।
40 करोड़ का टेंडर सीधे 90 करोड़ का हुआ मुकेश नायक ने आंकड़ों के साथ खुलासा करते हुए बताया कि वर्ष 2023 में वीना राणा के कार्यकाल के दौरान टेंडर की राशि को 40 करोड़ रुपये से बढ़ाकर सीधे 90 करोड़ रुपये कर दिया गया। टेंडर की शर्तें इस तरह से ‘कस्टमाइज’ की गईं कि केवल पसंदीदा कंपनियों को ही फायदा मिले। उदाहरण के तौर पर, एंटीवायरस कंपनी का कार्यालय भोपाल में होना और 1000 का रजिस्ट्रेशन होना जैसी अनिवार्य शर्तें डालकर बड़ी और वाजिब कंपनियों को प्रतिस्पर्धा से बाहर कर दिया गया।
बाजार मूल्य से कई गुना अधिक दामों पर खरीदी घोटाले की गंभीरता का अंदाजा उपकरणों की खरीद कीमतों से लगाया जा सकता है:
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कंप्यूटर: बाजार मूल्य ₹39,000, खरीदा गया ₹1,39,000 में।
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यूपीएस (UPS): बाजार मूल्य ₹1,800, खरीदा गया ₹9,000 में।
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प्रिंटर: बाजार मूल्य ₹25,000, खरीदा गया ₹1,00,000 में।
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स्मार्ट क्लास बोर्ड: बाजार मूल्य ₹70,000, खरीदा गया ₹1,14,000 में।
जांच रोकने और सिंडिकेट को संरक्षण देने का आरोप आरोप है कि सीवीसी (CVC) गाइडलाइंस की खुलेआम धज्जियां उड़ाई गईं। लोकायुक्त और पीएमओ (PMO) के निर्देशों के बावजूद प्रभावशाली अधिकारियों ने जांच को आगे नहीं बढ़ने दिया। मुकेश नायक ने बताया कि 2026 में खरीद प्रक्रिया को केंद्रीकृत (Centralized) कर दिया गया है ताकि वही पुराना सिंडिकेट एक बार फिर बड़े घोटाले को अंजाम दे सके।
विपक्ष की मांग: SIT जांच और फॉरेंसिक ऑडिट कांग्रेस ने साल 2023 से अब तक के सभी टेंडरों की SIT जांच और फॉरेंसिक ऑडिट की मांग की है। मुकेश नायक ने चेतावनी दी है कि यदि भ्रष्ट अधिकारियों और सिंडिकेट पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो विपक्ष सड़कों पर उतरकर सत्याग्रह और धरना-प्रदर्शन करेगा। साथ ही, उन्होंने मुकेश मल्होत्रा के निर्वाचन पर सुप्रीम कोर्ट के ‘स्टे’ का स्वागत करते हुए इसे लोकतंत्र की जीत बताया।











