CG NEWS : लैलूंगा में भूमि नामांतरण विवाद ने लिया संभागीय मोड़: वारिसों ने आयुक्त बिलासपुर को भेजी विस्तृत शिकायत, तहसीलदार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल

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CG NEWS : गौरी शंकर गुप्ता /रायगढ़/लैलूंगा। तहसील लैलूंगा अंतर्गत लैलूंगा नगर का बहुचर्चित भूमि नामांतरण विवाद अब संभागीय स्तर तक पहुंच गया है। मृतक जहरसाय के वैध वारिसों ने आज बिलासपुर संभाग के आयुक्त को एक विस्तृत शिकायत पत्र प्रेषित कर मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। शिकायत में तहसीलदार शिवम पांडे पर राजस्व नियमों की अनदेखी करते हुए नामांतरण आदेश पारित करने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

CG NEWS : शिकायतकर्ताओं का कहना है कि लैलूंगा नगर स्थित खसरा नंबर 622/12 एवं 502/6 की कुल 1.290 हेक्टेयर भूमि, जो पूर्व में जहरसाय के नाम दर्ज थी, उनके निधन के पश्चात उत्तराधिकार के तहत सभी वैध वारिसों के नाम दर्ज किए जाने चाहिए थे। राजस्व प्रक्रिया के अनुसार नामांतरण से पूर्व समस्त वारिसों को विधिवत नोटिस देना, आपत्तियों के लिए अवसर प्रदान करना तथा आवश्यक होने पर सार्वजनिक सूचना जारी करना अनिवार्य होता है। आरोप है कि वर्ष 2023-24 में दर्ज प्रकरण में 9 अप्रैल 2025 एवं 15 अप्रैल 2025 को आदेश पारित कर दिए गए, लेकिन कई वैध वारिसों को न तो नोटिस दिया गया और न ही उन्हें सुनवाई का अवसर मिला। शिकायत में इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन बताया गया है। वारिसों का कहना है कि प्रक्रिया में पारदर्शिता न होने से न केवल उनके वैधानिक अधिकार प्रभावित हुए, बल्कि राजस्व अभिलेखों की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न लग गया है।

CG NEWS : गंभीर आरोप यह भी है कि नामांतरण के बाद संबंधित भूमि का क्रय-विक्रय कर लिया गया, जिससे अन्य वारिसों के अधिकार और अधिक जटिल स्थिति में पहुंच गए हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि प्रारंभिक स्तर पर नियमों का पालन किया गया होता तो यह विवाद उत्पन्न ही नहीं होता।

इस पूरे प्रकरण में तहसीलदार शिवम पांडे की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आवेदन में उल्लेख है कि बिना समुचित जांच और सभी पक्षों को सुनवाई का अवसर दिए आदेश पारित करना प्रशासनिक लापरवाही अथवा प्रक्रिया संबंधी गंभीर त्रुटि की ओर संकेत करता है। हालांकि संबंधित अधिकारी की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं हुई है।

वारिसों ने यह भी बताया कि वे पूर्व में जिला स्तर पर कलेक्टर एवं अन्य राजस्व अधिकारियों को कई बार लिखित एवं मौखिक शिकायत दे चुके हैं। इसके बावजूद अपेक्षित कार्रवाई न होने के कारण उन्हें संभागीय आयुक्त से हस्तक्षेप की मांग करनी पड़ी। आयुक्त को भेजे गए आवेदन की प्रतिलिपि संयुक्त कलेक्टर प्रियंका वर्मा तथा अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को भी सौंपी गई है, ताकि प्रकरण की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए समन्वित कार्रवाई की जा सके।

शिकायत में स्पष्ट मांग की गई है कि—

विवादित नामांतरण आदेश की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
यदि प्रक्रिया में अनियमितता पाई जाती है तो आदेश को निरस्त किया जाए।
संबंधित अधिकारियों एवं व्यक्तियों की जवाबदेही तय की जाए।
सभी वैध वारिसों के अधिकारों की विधिसम्मत सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

ग्राम लेवरा और आसपास के क्षेत्र में इस मामले को लेकर व्यापक चर्चा है। ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल एक भूमि विवाद नहीं, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता, जवाबदेही और न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता का प्रश्न बन चुका है। यदि समय रहते उच्चस्तरीय जांच नहीं हुई तो यह विवाद और अधिक जटिल रूप ले सकता है।

अब निगाहें बिलासपुर संभाग के आयुक्त कार्यालय पर टिकी हैं कि शिकायत पर क्या संज्ञान लिया जाता है, क्या विशेष जांच के निर्देश जारी होते हैं, और क्या संबंधित राजस्व आदेशों की समीक्षा की जाएगी। क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि संभागीय स्तर पर हस्तक्षेप से मामले की निष्पक्ष जांच संभव हो सकेगी और पीड़ित पक्ष को न्याय मिलेगा।

 

 

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