Himangi Sakhi Kinnar Shankaracharya : भोपाल (15 फरवरी 2026): मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में महाशिवरात्रि के अवसर पर आयोजित एक विशेष किन्नर धर्म सम्मेलन में हिमांगी सखी का पट्टाभिषेक देश की पहली किन्नर शंकराचार्य के रूप में किया गया। किन्नर अखाड़े के संस्थापक ऋषि अजय दास की मौजूदगी में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यह घोषणा हुई। आयोजकों के मुताबिक, राजस्थान के पुष्कर पीठ का चयन इस ऐतिहासिक उपाधि के लिए किया गया है।
धर्म परिवर्तन के बाद घर वापसी
इस सम्मेलन की एक और बड़ी विशेषता ‘घर वापसी’ का दावा रही। आयोजकों ने मंच से घोषणा की कि धर्म परिवर्तन कर चुके 60 किन्नरों ने शुद्धिकरण प्रक्रिया के माध्यम से पुनः हिंदू धर्म स्वीकार किया है। इनमें से कई मुस्लिम धर्म अपना चुके थे। हालांकि, प्रशासन की ओर से इस दावे की आधिकारिक पुष्टि होना अभी शेष है, लेकिन इस आयोजन ने शहर के धार्मिक और सामाजिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है।
कौन हैं हिमांगी सखी?
नवनियुक्त शंकराचार्य हिमांगी सखी मूल रूप से मुंबई की रहने वाली हैं और वे दुनिया की पहली किन्नर भागवत कथा वाचक के रूप में भी प्रसिद्ध हैं। वे मां वैष्णो किन्नर अखाड़ा की प्रमुख हैं और इससे पहले महामंडलेश्वर और जगद्गुरु के पद पर भी रह चुकी हैं। अपनी विद्वत्ता और धार्मिक नेतृत्व के कारण वे लंबे समय से किन्नर समुदाय की आवाज रही हैं।
सम्मेलन में अन्य नियुक्तियां
सम्मेलन के दौरान केवल शंकराचार्य ही नहीं, बल्कि किन्नर परंपरा के अंतर्गत 4 जगद्गुरुओं और 5 महामंडलेश्वरों के नामों की भी घोषणा की गई। इस दौरान बड़ी संख्या में विभिन्न राज्यों से आए संत-महात्मा और किन्नर समुदाय के प्रतिनिधि मौजूद रहे। गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से भोपाल में किन्नर समुदाय के भीतर गद्दी और धर्म परिवर्तन को लेकर विवाद चल रहा था, जिसे देखते हुए इस पट्टाभिषेक को एक बड़े शक्ति प्रदर्शन के रूप में भी देखा जा रहा है।
हिमांगी सखी, पहली किन्नर शंकराचार्य
“सनातन धर्म में किन्नर समुदाय का स्थान हमेशा से पूजनीय रहा है। शंकराचार्य के पद पर आसीन होना व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे समुदाय की धार्मिक प्रतिष्ठा की जीत है। हमारा लक्ष्य धर्म का प्रचार करना और भटके हुए साथियों को पुनः सनातन मार्ग पर लाना है।”











