Raipur City News: रायपुर। राजधानी में गर्मी की शुरुआत से पहले ही पेयजल संकट गहराने लगा है। लाल बहादुर शास्त्री वार्ड के शिव मंदिर क्षेत्र की गली नंबर 1 से 5 तक करीब 450 घरों में अमृत मिशन का पानी नहीं पहुंच रहा है। पिछले 20 दिनों से समस्या जस की तस बनी हुई है।
Raipur City News: मामले को लेकर नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने नगर निगम आयुक्त विश्वदीप और जल बोर्ड के अधिकारियों को मौके पर बुलाकर निरीक्षण कराया और जमीनी स्थिति से अवगत कराया। उनके अनुसार, अहिल्याबाई होलकर चौक से बिछाई गई 4 इंच की पाइपलाइन के माध्यम से यादवपारा, धोबीपारा और अर्जुन चौक सहित लगभग 900 घरों में पानी की आपूर्ति की जा रही है। एक ही लाइन पर अधिक कनेक्शन होने से पानी का दबाव कम हो गया है, जिसके कारण शिव मंदिर क्षेत्र की गलियों में पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पा रहा।
Raipur City News: आकाश तिवारी ने बताया कि उन्होंने 22 जनवरी को ही स्पष्ट कर दिया था कि केवल वाल्व लगाने से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। इसके बावजूद जल बोर्ड ने 3 से 5 लाख रुपये खर्च कर 10, 8 और 6 इंच के तीन वाल्व लगाए, लेकिन 20 दिन बाद भी स्थिति में सुधार नहीं हुआ। फिलहाल जल बोर्ड के अधिकारियों ने अर्जुन चौक के पास दो दिन के लिए वाल्व लगाकर पानी के फोर्स की जांच करने की बात कही है।
Raipur City News: नेता प्रतिपक्ष ने सुझाव दिया है कि पुरानी 4 इंच की पाइपलाइन को अर्जुन चौक तक सीमित कर दिया जाए और अहिल्याबाई होलकर चौक से शिव मंदिर क्षेत्र की गली नंबर 1 से 5 तक नई 4 इंच की पाइपलाइन बिछाई जाए, ताकि प्रभावित घरों को नियमित जल आपूर्ति मिल सके।नगर निगम आयुक्त विश्वदीप ने आश्वासन दिया है कि यदि वाल्व लगाने के बाद भी पानी का दबाव नहीं बढ़ता है तो नई 4 इंच की पाइपलाइन डाली जाएगी।
Raipur City News: स्थायी समाधान में हो रही देरी पर नेता प्रतिपक्ष ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब जमीनी स्थिति स्पष्ट है, तब भी समाधान में विलंब समझ से परे है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य केवल इतना है कि वार्ड के नागरिक अपने मूलभूत जल अधिकार से वंचित न रहें।
Raipur City News: उन्होंने यह भी चिंता जताई कि यदि अभी एक वार्ड में यह स्थिति है, तो गर्मी बढ़ने पर हालात और बिगड़ सकते हैं। साथ ही अन्य 69 वार्डों की स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए। आकाश तिवारी ने महापौर और परिषद पर आरोप लगाया कि वे केवल बैठकों तक सीमित हैं, जबकि जमीनी स्तर पर समस्या का प्रभावी समाधान नहीं हो पा रहा है।













