Salai Dhawada Tree Damage : बुरहानपुर/जबलपुर (13 फरवरी 2026): जबलपुर हाई कोर्ट ने बुरहानपुर वन विभाग के आला अधिकारियों के खिलाफ कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी किया है। यह कार्रवाई एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान की गई, जिसमें जिले के जंगलों में सलाई और धवड़ा वृक्षों से अवैज्ञानिक तरीके से गोंद निकालने और पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया गया है।
क्या है पूरा मामला?
हाई कोर्ट में दायर जनहित याचिका में तर्क दिया गया कि बुरहानपुर वन विभाग के क्षेत्रों में सलाई और धवड़ा वृक्षों से गोंद निकालने पर प्रतिबंध होने के बावजूद, अधिकारियों द्वारा धड़ल्ले से लाइसेंस जारी किए जा रहे हैं। याचिकाकर्ता के वकील ने संभागीय वन अधिकारी (DFO) की ही एक चौंकाने वाली जांच रिपोर्ट पेश की, जिसने विभाग के दावों की पोल खोल दी।

जांच रिपोर्ट के चौंकाने वाले तथ्य
कोर्ट में पेश की गई रिपोर्ट के अनुसार बुरहानपुर के जंगलों की स्थिति चिंताजनक है:
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क्षतिग्रस्त वृक्ष: जिले के 89% सलाई वृक्ष और 73% धवड़ा वृक्ष बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं।
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घातक रसायनों का प्रयोग: गोंद निकालने के लिए पेड़ों पर कृत्रिम रसायनों का छिड़काव किया जा रहा है, जिससे ये पेड़ अंदर से खोखले होकर सूख रहे हैं।
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नियमों की अनदेखी: प्रतिबंध के बावजूद व्यावसायिक लाभ के लिए लाइसेंस बांटने का गंभीर आरोप लगाया गया है।
कोर्ट की कड़ी चेतावनी: ‘कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट’ की तैयारी
माननीय उच्च न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग को नोटिस जारी कर पूछा है कि इन परिस्थितियों के लिए कौन जिम्मेदार है। कोर्ट ने स्पष्ट हिदायत दी है कि यदि भविष्य में अदालत के आदेशों का उल्लंघन पाया गया, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ ‘कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट’ (अदालत की अवमानना) के तहत कठोर दंडात्मक कार्यवाही की जाएगी।
निष्कर्ष: इस नोटिस के बाद बुरहानपुर वन विभाग में हड़कंप मच गया है। पर्यावरण प्रेमियों ने इस आदेश का स्वागत किया है, क्योंकि रसायनों के प्रयोग से वन संपदा को अपूरणीय क्षति पहुँच रही थी।













