sukma news : कृष्णा नायक /सुकमा :सुकमा जिले का अति संवेदनशील गोगुंडा इलाका एक बार फिर सुरक्षा बलों की साहसिक और सतर्क कार्रवाई का गवाह बना है। जिस क्षेत्र को वर्षों तक माओवादी हिंसा, डर और असुरक्षा का प्रतीक माना जाता रहा, वहां अब हालात तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। सीआरपीएफ 74 वाहिनी और कोबरा 201 वाहिनी की संयुक्त कार्यवाही ने माओवादियों की एक बड़ी साजिश को नाकाम करते हुए इलाके में भरोसे की नई किरण जगाई है।
sukma news : एरिया डोमिनेशन पर निकले जवानों ने गोगुंडा के दुर्गम जंगलों और पहाड़ी इलाकों में सघन सर्चिंग अभियान चलाया। इसी दौरान माओवादियों के एक छिपे हुए डंप का खुलासा हुआ, जहां से हथियार, नक्सली साहित्य और अन्य प्रतिबंधित सामग्री बरामद की गई। यह डंप इस बात का संकेत था कि माओवादी संगठन अब भी इस क्षेत्र में अपनी पकड़ बनाए रखने की कोशिश में था, लेकिन सुरक्षा बलों की पैनी नजर से वह बच नहीं सका।
sukma news : अभियान के दौरान सबसे गंभीर और संवेदनशील स्थिति तब सामने आई, जब गोगुंडा पहाड़ के दूसरी छोर पर जवानों को एक खतरनाक बियर बम मिला। माओवादी इस तरह के विस्फोटकों का इस्तेमाल सुरक्षा बलों और ग्रामीणों को नुकसान पहुंचाने के लिए करते रहे हैं। जवानों ने पूरी सतर्कता और तकनीकी दक्षता के साथ मौके पर ही बियर बम को निष्क्रिय कर दिया, जिससे एक बड़ी अनहोनी टल गई।
sukma news : गौरतलब है कि इसी इलाके में ठीक एक दिन पहले माओवादियों के कुख्यात लीडर रमन्ना की स्मृति में बनाए गए स्मारक को भी सुरक्षा बलों ने जमींदोज कर दिया था। वर्षों तक यह स्मारक माओवादी आतंक और संगठनात्मक प्रभुत्व का प्रतीक बना रहा। स्मारक के ध्वस्तीकरण को माओवादियों के मनोबल पर बड़ा झटका माना जा रहा है, और विशेषज्ञों के अनुसार उसी दबाव का असर है कि उनके हथियारों के डंप और विस्फोटक अब सामने आ रहे हैं।
sukma news : सीआरपीएफ 74 वाहिनी के कमांडेंट हिमांशु पांडे ने कहा कि गोगुंडा जैसे संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बलों की लड़ाई सिर्फ हथियारों से नहीं, बल्कि डर की उस मानसिकता को तोड़ने की है, जो माओवादियों ने वर्षों से फैलाई है। उन्होंने बताया कि लगातार एरिया डोमिनेशन और संयुक्त अभियानों से नक्सली नेटवर्क कमजोर हो रहा है।
sukma news : स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि सुरक्षा बलों की सक्रियता से अब इलाके में पहले से ज्यादा सुरक्षा महसूस हो रही है। जंगल और रास्ते अब उतने डरावने नहीं रहे, जितने पहले हुआ करते थे। विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसी कार्रवाइयों से न सिर्फ माओवादी हिंसा पर लगाम लगेगी, बल्कि विकास और शांति की राह भी मजबूत होगी। गोगुंडा में लगातार दो दिनों में मिली यह सफलता नक्सलवाद के खिलाफ जारी संघर्ष में एक अहम उपलब्धि मानी जा रही है।













