SP Shashi Mohan Singh : गौरी शंकर गुप्ता/रायगढ़/घरघोड़ा। रायगढ़ जिले के नए पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) के रूप में शशिमोहन सिंह ने कार्यभार संभाल लिया है। जशपुर में अपनी “क्राइम किलर” छवि और गौ-तस्करी व जुए के फड़ पर बाराती बनकर रेड मारने वाले इस अफसर से रायगढ़ की जनता को काफी उम्मीदें हैं। लेकिन, जिले के सबसे संवेदनशील इलाकों में से एक घरघोड़ा उनके लिए लिटमस टेस्ट साबित होने वाला है।
अवैध धंधों का ‘सेफ हेवन’ बना घरघोड़ा? घरघोड़ा क्षेत्र लंबे समय से डीजल चोरी, कबाड़ के अवैध धंधे, रेत तस्करी और जुआ-सट्टा का केंद्र बना हुआ है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यहाँ अपराधियों में पुलिस का खौफ खत्म हो चुका है। हाल ही में रायगढ़ में 2000 लीटर चोरी का डीजल बरामद कर एक गिरोह का पर्दाफाश किया गया है (23 जनवरी 2026), लेकिन घरघोड़ा जैसे क्षेत्रों में अभी भी “सेटिंग” की चर्चाएं आम हैं। जनता का सवाल वाजिब है—क्या थाने से चंद कदमों की दूरी पर चलने वाले ये काले धंधे बिना संरक्षण के संभव हैं?
‘स्थायी’ पोस्टिंग और सिस्टम का मकड़जाल आपकी टिप्पणी एक गंभीर प्रशासनिक खामी की ओर इशारा करती है—थाने में वर्षों से जमे कुछ पुलिसकर्मी। पुलिस महकमे में यह माना जाता है कि एक ही स्थान पर लंबे समय तक पदस्थापना भ्रष्टाचार और साठगांठ को जन्म देती है। एसएसपी शशिमोहन सिंह, जो सख्त अनुशासन के लिए जाने जाते हैं, क्या इन “खास चेहरों” की सर्जरी करेंगे? जनता अब केवल निरीक्षण और मुलाकातों से संतुष्ट नहीं होने वाली; उन्हें ज़मीनी स्तर पर रेड, गिरफ्तारी और ठोस कार्रवाई चाहिए।
जीरो टॉलरेंस: उम्मीद और हकीकत शशिमोहन सिंह ने कार्यभार संभालते ही स्पष्ट किया है कि अपराध नियंत्रण और कम्युनिटी पुलिसिंग उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। घरघोड़ा की बदहाली को देखते हुए, यहाँ “क्लीन स्वीप” ऑपरेशन की सख्त आवश्यकता है। यदि आने वाले दिनों में रेत माफियाओं और डीजल चोरों पर बड़े प्रहार होते हैं, तभी जनता का भरोसा सिस्टम पर बहाल होगा। वरना, “कप्तान बदले, पर किस्मत नहीं” वाली कहावत घरघोड़ा के लिए चरितार्थ होती रहेगी।













