Monday, August 24, 2026
Home National UGC Equality Regulations 2026 : शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का आश्वासन :...

UGC Equality Regulations 2026 : शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का आश्वासन : ‘UGC नियमों से किसी के साथ भेदभाव नहीं होगा, संविधान के दायरे में है फैसला’

UGC Equality Regulations 2026 : नई दिल्ली/लखनऊ। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा अधिसूचित ‘उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के विनियम, 2026’ ने देश की राजनीति और शैक्षिक गलियारों में भूचाल ला दिया है। 15 जनवरी से लागू हुए इन नियमों के विरोध में दिल्ली स्थित यूजीसी मुख्यालय के बाहर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिल रही है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मुख्यालय की सुरक्षा बढ़ा दी गई है और चारों ओर बैरिकेड्स लगा दिए गए हैं।

उत्तर प्रदेश में बढ़ा आक्रोश विरोध की सबसे तीव्र लहर उत्तर प्रदेश में देखी जा रही है। बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने इन नियमों के विरोध में अपने पद से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया है। वहीं, रायबरेली में भाजपा किसान नेता रमेश बहादुर सिंह और गौरक्षा दल ने सवर्ण सांसदों को चूड़ियां भेजकर अपना विरोध दर्ज कराया। प्रख्यात कवि डॉ. कुमार विश्वास ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से सवर्णों की स्थिति पर तंज कसते हुए इसे एक पक्षीय बताया है।

शिक्षा मंत्री का स्पष्टीकरण विवाद बढ़ता देख केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मोर्चा संभाला है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को भरोसा दिलाते हुए कहा, “मैं विनम्रतापूर्वक यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि यूजीसी के नए नियमों से किसी के साथ भेदभाव या उत्पीड़न नहीं होगा। यह निर्णय संविधान की सीमाओं और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत लिया गया है।” उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि कानून का कोई दुरुपयोग न कर पाए।

विवाद की मुख्य जड़: क्या है नियम? यूजीसी के नए नियमों के तहत हर उच्च शिक्षण संस्थान में इक्विटी कमेटी, इक्विटी स्क्वाड और इक्वल अपॉर्चुनिटी सेल (EOC) बनाना अनिवार्य कर दिया गया है।

  • सख्त कार्रवाई: यदि किसी संस्थान में SC, ST या OBC छात्रों के साथ भेदभाव साबित होता है, तो यूजीसी उस संस्थान की फंडिंग (अनुदान) रोक सकता है और मान्यता भी रद्द कर सकता है।

  • विस्तृत परिभाषा: भेदभाव की परिभाषा को इतना व्यापक बनाया गया है कि इसमें छोटी-मोटी शिकायतों पर भी संस्थानों पर गाज गिर सकती है।

सामान्य वर्ग के छात्रों और संगठनों का आरोप है कि ये नियम केवल एक पक्षीय हैं और इनका उपयोग शैक्षणिक संस्थानों में सवर्ण छात्रों और शिक्षकों को निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है। विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय अब डैमेज कंट्रोल में जुट गए हैं।

Share The News

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here